Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद ममता बनर्जी अब तक के सबसे बड़े सियासी संकट का सामना कर रही हैं। टीएमसी विधायकों के बिखराव से शुरू हुआ संकट सांसदों तक पहुंच गया है। एक-एक कर सांसद बागी गुट में शामिल हो रहे हैं। टीएमसी टूटने के कगार पर पहुंच चुकी है। ममता बनर्जी को झटके पर झटके लग रहे हैं। बुधवार को सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) से इस्तीफा दे दिया। सुष्मिता बागी गुट का नेतृत्व करने वाली काकोली घोष (Kakoli Ghosh) के साथ हो गई हैं। चर्चा यह भी है कि सांसद सायोनी घोष (Sayoni Ghosh) भी बागी गुट के संपर्क में हैं और वह भी ममता से बगावत कर सकती हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: अब 'काबा-मदीना' वाली सायोनी घोष ने भी दिया ममता को झटका, बागी गुट में हुईं शामिल, TMC का क्या होगा?
कांग्रेस से टीएमसी में आईं सुष्मिता देव
टीएमसी में शामिल होने से पहले सुष्मिता कांग्रेस में थीं। वह असम के सिलचर से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद वह साल 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं। टीएमसी में शामिल होने के बाद ममता के करीब आईं और देखते ही देखते पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता बन गईं। बाद में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। रिपोर्टों में कहा गया है कि राज्यसभा सीट से इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में उन्होंने कथित रूप से असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि अब वह भाजपा में शामिल हो सकती हैं। राज्यसभा चेयरमैन को भेजे गए अपने पत्र में सुष्मिता ने अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर करने की अपील की है।
लोकसभा एवं राज्यसभा टीएमसी के सांसदों की संख्या
जाधवपुर से सांसद सायोनी घोष भी यदि बागी गुट में शामिल हो जाती हैं तो यह संख्या 21 हो जाएगी। दल बदल कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास 19 सांसदों का समर्थन चाहिए। लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। इनमें से 20 सांसद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ आना चाहते हैं। यदि ये 20 सांसद एनडीए में शामिल हो जाते हैं तो ममता के पास निम्न सदन में केव 8 सांसद बचेंगे। जबकि सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी के 11 सांसद हैं।
टीएमसी के राज्यसभा सदस्य
- डेरेक ओ ब्रायन
- सागरिका घोष
- मोहम्मद नदीमुल हक
- डोला सेन
- ममता बाला ठाकुर
- समीरुल इस्लाम
- प्रकाश चिक बाराइक
- बाबुल सुप्रियो
- राजीव कुमार
- मेनका गुरुस्वामी
- कोयल मल्लिक
TMC लोकसभा सांसद
- अभिषेक बनर्जी-डायमंड हार्बर
- अबू ताहिर खान-मुर्शिदाबाद
- अरूप चक्रवर्ती-बांकुरा
- असित कुमार मल-बोलपुर
- बापी हलधर-मथुरापुर
- दीपक अधिकारी-घाटल
- डॉ. काकली घोष दस्तीदार-बारासात
- डॉ. शर्मिला सरकार-बर्धमान पूर्व
- जगदीश बसुनिया-कूचबिहार
- जून मलैया-मेदिनीपुर
- कालिपदा सरेन-झारग्राम
- कल्याण क्र. बनर्जी-सेरामपुर
- खलीलुर रहमान-जंगीपुर
- कीर्ति आजाद, बर्धमान-दुर्गापुर
- महुआ मोइत्रा-कृष्णानगर
- माला रॉय-कोलकाता साउथ
- मिताली बाग-आरामबाग
- पार्थ भौमिक-बैरकपुर
- प्रसून बनर्जी-हावड़ा
- प्रतिमा मंडल-जयनगर
- रचना बनर्जी-हुगली
- सजदा अहमद-उलुबेरिया
- सताब्दी रॉय-बीरभूम
- सौगत रॉय-दमदम
- सयानी घोष-जादवपुर
- शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा-आसनसोल
- सुदीप बंद्योपाध्याय-कोलकाता नॉर्थ
- यूसुफ पठान-बहरामपुर
काकोली का दावा- हमारे साथ 20 सांसद
तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि उनके साथ 20 लोकसभा सांसद हैं और उन्होंने एनडीए को समर्थन देने का फ़ैसला किया है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग हुए गुट की बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर में बैठक हुई थी। यहीं पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उनसे मिले थे। इसी बैठक में यह फैसला किया गया कि दस्तीदार के नेतृत्व में सांसदों को अलग बिठाने की मांग की जाए।
कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार
काकोली घोष दस्तीदार की गिनती टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में होती है। वह लोकसभा में कई मुद्दों पर पार्टी की राय मुखरता से रखती आई हैं। वह टीएमसी की महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पेशे से डॉक्टर काकोली घोष ने कांग्रेस के छात्र आंदोलन के जरिए राजनीति में कदम रखा था और 1970 के दशक से ममता बनर्जी के साथ उनका लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। काकोली 2009, 2014, 2019 और 2024 में टीएमसी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। समय के साथ वह टीएमसी के भीतर संगठन का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं और संसद में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए भी जानी जाती थीं।
