TMC Rebel MP: ममता बनर्जी की टीएमसी में बगावत का दौर जारी है। टीएमसी के नाराज 20 सांसदों का बागी गुट आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। गुट लोकसभा में अभिषेक बनर्जी की बजाय काकोली घोष को नेता मान्यता दिलाने की मांग कर सकता है। बागी सांसदों ने कल स्पीकर को पत्र लिखकर एनडीएम में शामिल होने की बात कही थी।
टीएमसी में राजनीतिक तूफान उठा
तृणमूल कांग्रेस में एक नया राजनीतिक तूफान उठ रहा है, बागी सांसद दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। बागी खेमे के सूत्रों का दावा है कि उनकी संख्या बढ़ रही है और पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद यूसुफ पठान के भी इस समूह में शामिल होने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी संकट को संभालने के प्रयासों के बीच दिल्ली में मौजूद हैं। खबरों के मुताबिक, बागी गुट खुद को असली टीएमसी घोषित करने और अध्यक्ष से मान्यता प्राप्त करने की तैयारी कर रहा है, जिससे पार्टी पर नियंत्रण की लड़ाई और तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है।
काकोली घोष का दावा- 20 सांसद एनडीए के समर्थन में
टीएमसी में गहराते राजनीतिक संकट के बीच, वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और उन्होंने अध्यक्ष ओम बिरला को अपनी स्थिति से अवगत करा दिया है, जिससे पार्टी की संसदीय इकाई में फूट पड़ गई है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी नेतृत्व को मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी हाई कमांड के वरिष्ठ नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के फैसले का विरोध किया और निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी को इस पद पर चुन लिया।
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से टीएमसी में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल सोमवार को उसके संसदीय खेमे में भी फैलती नजर आई। कुछ बागी सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया, जबकि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ अखिल भारतीय रणनीति बनाने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक में भाग लेने दिल्ली में थीं।
कल्याण बनर्जी बोले, स्पीकर को लिखी चिट्ठी सार्वजनिक करें
वहीं, आज टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि काकोली घोष की वो चिट्ठी जो स्पीकर को लिखी गई, वो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। 24 घंटे बाद भी नहीं हुई है। लोकसभा स्पीकर के ऑफिस का भी कहना है कि अभी तक कोई चिट्ठी नहीं आई है। जिस तरह से वो लोग भूपेंद्र यादव के घर गए..किसने मिलाया, कैसे मिलाया ये सब पता नहीं, लेकिन अब उनके नेता नरेंद्र मोदी हो गए हैं, ममता बनर्जी नहीं रहीं। उनके पास 20-21-22-23 जितने भी सांसद हों, उन्हें अगर 10th शेड्यूल के तहत अयोग्य होने से बचना है तो बीजेपी में शामिल होना ही होगा।
टीएमसी संसदीय विंग में पहली बार बड़ा विभाजन
इस नाटकीय घटनाक्रम से टीएमसी की स्थापना के बाद से पार्टी के संसदीय विंग में पहली बार बड़ा विभाजन हुआ है और देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टियों में से एक के भीतर व्यापक पुनर्गठन की संभावना बढ़ गई है। पीटीआई से फोन पर बात करते हुए काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 20 सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, मेरे समेत लगभग 20 टीएमसी सांसदों ने बंगाल के विकास के लिए एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है। हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को औपचारिक रूप से समर्थन देने का निर्णय लिया है। बता दें कि चार बार सांसद रहीं काकोली ने पिछले सप्ताह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
बाद में एक समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र पहले ही अध्यक्ष को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि पत्र अध्यक्ष तक पहुंच चुका है। हमने एक अलग गुट के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, बागी सांसद स्पीकर के समक्ष यह तर्क देने देना चाहते हैं कि काकोली घोष दस्तीदार लोकसभा में पार्टी के वैध मुख्य सचेतक बनी हुई हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे।
