S Jaishankar News: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को बताया कि कैशलेस पेमेंट के मामले में अमेरिका और चीन से भारत काफी ज्यादा आगे है। उन्होंने कहा कि दुनिया को किसी तरह के पुन: वैश्वीकरण की सख्त जरूरत है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत 'गैर पश्चिमी देश है लेकिन पश्चिम का विरोधी नहीं है।' जयशंकर वाशिंगटन डीसी में 'थिंक टैंक' हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा "नयी प्रशांत व्यवस्था में भारत की भूमिका" विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'यदि आप इसे एक साथ रखें तो मैं आपको सुझाव दूंगा कि दुनिया को किसी प्रकार के पुन: वैश्वीकरण की सख्त जरूरत है।'
कैशलेस पेमेंट को लेकर भारत ने किस-किस को पछाड़ा?
एस जयशंकर का कहना है, "भारत सर्वोत्तम प्रथाओं का अवशोषक है। आप सभी ने देखा होगा कि पिछले दशक में कैसे योग को लेकर हमारी अपील ने वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार किया है। दूसरी ओर भारत में अगर आप कहीं भी खरीदारी करने जाएंगे तो आज आप अपने बटुए को पीछे छोड़ सकते हैं, लेकिन अपना फोन नहीं भूल सकते हैं। इस बात की सबसे ज्यादा संभावना है कि आप जिस व्यक्ति से कुछ खरीद रहे हैं वह नकद स्वीकार करे या ना करे वो ये चाहेगा कि आप अपना फोन निकालें, क्यूआर कोड स्कैन करें और कैशलेस पेमेंट करें। पिछले साल हमने 90 बिलियन कैशलेस वित्तीय भुगतान किया था। मैं बताना चाहता हूं कि अमेरिका लगभग 3 (बिलियन) था, और चीन 17.6 (बिलियन) था। इस साल, हम शायद 90 बिलियन से भी आगे निकल जाएंगे। सिर्फ जून के महीने में हमारे देश में 9 बिलियन की डिजिटल लेनदेन हुई थी। स्ट्रीट वेंडरों के पास आज उनके ठेले पर एक क्यूआर कोड होगा।"
संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर एस जयशंकर ने उठाया सवाल
उन्होंने आगे कहा कि "हम आज यह मानते हैं कि जब सबसे अधिक आबादी वाला देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं है, जब पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वहां नहीं है, जब 50 से अधिक देशों का महाद्वीप वहां नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में जाहिर तौर पर विश्वसनीयता की कमी है और काफी हद तक प्रभावशीलता की भी। जब हम दुनिया के पास जाते हैं, तो हम उसको नीचे गिराने जैसे दृष्टिकोण के साथ नहीं जाते। यह अहम है कि हम इसे बेहतर, कुशल, उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए क्या कर सकते हैं..."
'पिछले 6 वर्षों में एक और अवधारणा ने जोर पकड़ा वह है क्वाड'
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, "इंडो-पैसिफिक से संबंधित, पिछले 6 वर्षों में एक और अवधारणा ने जोर पकड़ा वह क्वाड है। पहली बार 2007 में इसका प्रयास किया गया था, लेकिन यह टिक नहीं पाया और फिर एक दशक के बाद 2017 में इसे पुनर्जीवित किया गया। 2017 में, यह अमेरिका में नौकरशाही स्तर पर किया गया, 2019 में यह एक मंत्री मंच बन गया और 2021 में यह यह एक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मंच बना। यह लगातार मजबूत होता जा रहा है और हमें अगले साल भारत में शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने का सौभाग्य मिलेगा।"
भारत गैर-पश्चिमी है, पश्चिम विरोधी नहीं है- विदेश मंत्री एस जयशंकर
डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "आज हम जिस दुनिया में रहते हैं, वह काफी हद तक पश्चिमी निर्मित है। अब, यदि आप दुनिया की तरफ देखें, तो पिछले 8 वर्षों में स्पष्ट रूप से भारी परिवर्तन हुआ है। अब, भारत के लिए, जब हम बड़े पैमाने पर पश्चिमी निर्मित दुनिया का सामना करते हैं। जाहिर है, हम उन बदलावों को प्रोत्साहित करना, सुविधाजनक बनाना, प्रेरित करना और दबाव डालना चाहेंगे जिनकी बेहद जरूरत है। इसलिए जहां तक भारत के संबंध में मैं यह ध्यान में रखता हूं। भारत गैर-पश्चिमी है, पश्चिम विरोधी नहीं है।"
यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर क्या बोले भारत के विदेश मंत्री?
रूस के बारे में मंत्री ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के परिणामस्वरूप मॉस्को के साथ पश्चिमी देशों के संबंध लगभग टूट गए हैं। उन्होंने कहा कि आज यूरोपीय शक्ति रहा रूस एशिया की ओर देख रहा है और एशियाई देशों के साथ अपने संबंध बना रहा है। बढ़ते रूस-चीन संबंधों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, 'रूस ने हमेशा खुद को यूरोपीय के रूप में देखा है...इसलिए (यूक्रेन में) जो हो रहा है उसके परिणामस्वरूप आप वास्तव में रूस का पुनर्निमाण देख रहे हैं।' जयशंकर ने अनुमान जताया कि रूस यूरोप, अमेरिका से दूर गैर-पश्चिमी दुनिया तथा एशिया, संभवतः अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
