अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश केस में एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बात कही है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि एयर इंडिया विमान दुर्घटना, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी, के लिए पायलट को दोष नहीं दिया जा सकता। अदालत ने अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया विमान दुर्घटना में मारे गए पायलट के 91 वर्षीय पिता से कहा कि उनके बेटे पर इस हादसे की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती और उन्हें इस अपराधबोध को अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए।
DGCA और AAIB को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को नोटिस जारी किया है और दिवंगत पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा है। इस याचिका में विमान दुर्घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। पीठ ने कहा, ‘‘आपको अपने ऊपर बोझ नहीं रखना चाहिए। विमान दुर्घटना के लिए पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह एक दुर्घटना थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है।’’
स्वतंत्र जांच की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि AAIB द्वारा की जा रही जांच स्वतंत्र नहीं है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस मामले में न्यायिक निगरानी में एक स्वतंत्र जांच कराई जाए। पायलट के पिता पुष्कराज सभरवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के संबंध में अमेरिकी प्रकाशन वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक समाचार लेख छपा था। पीठ ने जवाब दिया, ‘‘यह केवल भारत को दोषी ठहराने के लिए घटिया रिपोर्टिंग थी।’’
सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा
पीठ ने 12 जुलाई को जारी विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट का एक पैराग्राफ पढ़ा और कहा कि इसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि दुर्घटना के लिए पायलट को दोषी ठहराया जाना चाहिए और इसमें केवल विमान के दो पायलटों के बीच हुई बातचीत का उल्लेख है। उसने कहा, ‘‘एएआईबी जांच का दायरा दोषारोपण करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचने के लिए निवारक उपाय सुझाना है। यदि आवश्यक हुआ तो हम स्पष्ट कर देंगे कि पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।’’
