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अब उठी The Kerala Story पर बैन लगाने की मांग, विरोध में उतरी केरल सरकार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 1, 2023, 03:12 PM IST

The Kerala Story Controversy: The Kerala Story पर अब प्रतिबंध लगाने की मांग उठी है। केरल के अन्य राजनीतिक दल यूडीएफ और इसके युवा संगठन ने भी फिल्म की रिलीज बैन करने की मांग उठाई है। बता दें, इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी इस फिल्म की आलोचना कर चुके हैं।

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द केरल स्टोरी फिल्म पर विवाद

Photo : Twitter

The Kerala Story Controversy: विवादों में घिरी आगामी फिल्म The Kerala Story पर अब प्रतिबंध लगाने की मांग उठी है। केरल सरकार ने इस फिल्म पर बैन लगाने की वकालत की है। तो वहीं, केरल के अन्य राजनीतिक दल यूडीएफ और इसके युवा संगठन ने भी फिल्म की रिलीज बैन करने की मांग उठाई है। बता दें, इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी इस फिल्म की आलोचना कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस ने भी फिल्म को लेकर विरोध जताया है।

बता दें, केरल सीएम पिनराई विजयन ने कहा था कि यह फिल्म संघ परिवार के एजेंडो को आगे बढ़ा रही है। वहीं शशि थरूर ने ट्विटर पर फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा था कि यह हमारे केरल की कहानी नहीं है, यह आपके केरल की कहानी है।

प्रतिबंध लगाने का कोई फायदा नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक्जीबिटर्स यूनाइटेड ऑर्गनाइजेशन ऑफ केरला (एफईयूओके) ने कहा है कि द केरल स्टोरी पर प्रतिबंध लगाने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म तब लोग देखेंगे, जब यह ओटीटी पर रिलीज होगी। उन्होंने कहा, फिल्म पर प्रतिबंध लगाना एक अच्छी मिसाल नहींं है।

क्यों मचा है फिल्म पर बवाल

द केरल स्टोरी फिल्म चार मई को रिलीज होनी है, उससे पहले ही यह फिल्म विवादों से घिर गई है। दअरलस, फिल्म में केरल की हजारों लड़कियों की कहानी है, जो अचानक गायब हो जाती हैं। बात में सामने आता है कि इन लड़कियों का ब्रेन वॉश किया गया और धर्मपरिवर्तन कराकर उन्हें आईएस जैसे आतंकी संगठन में शामिल किया गया। बाद में इन लड़कियोंं को भारत समेत दुनिया के कई देशों में आतंकी मोर्चो में तैनात किया गया। केरल के मुख्यमंत्री विजयन का कहना है कि यह फिल्म संघ परिवार की झूठी की फैक्टरी में बना प्रोडक्ट है और इसे संघ परिवार के प्रोपेगेंडा को फैलाने के लिए बनाया गया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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