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अब XL और XXL होगा 'इंडिया साइज', जल्द लॉन्च होगा कपड़ों का 'मेड इन इंडिया' स्टैंडर्ड

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 25, 2023, 03:07 PM IST

Textiles Ministry: कपड़ा सचिव रचना शाह ने कहा कि कपड़ा मंत्रालय जल्द ही परिधानों के लिए 'इंडिया साइज' वाले मानकों को पेश करेगा। इन मानकों को भारतीय शारीरिक संरचना के अनुसार तैयार किया गया है।

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जल्द पेश होगा कपड़ों के लिए भारतीय मानक

Photo : BCCL

Textiles Ministry: अब कपड़ों के बेतरतीब नाप से जल्द ही आपको छुटकारा मिलने वाला है। यानी अपने साइज के हिसाब से XL या XXL साइज के कपड़े खरीदने पर आपको बिल्कुल फिट कपड़े मिलेंगे। दरअसल, टेक्सटाइल मिनिस्ट्री जल्द ही परिधानों के लिए इंडिया साइज वाले मानकों को पेश करने वाला है।

मंगलवार को कपड़ा सचिव रचना शाह ने कहा कि कपड़ा मंत्रालय जल्द ही परिधानों के लिए 'इंडिया साइज' वाले मानकों को पेश करेगा। इन मानकों को भारतीय शारीरिक संरचना के अनुसार तैयार किया गया है। इन मानकों के आने के बाद भारतीय ऐसे कपड़ों को खरीद सकेंगे, जो उनके लिए बेहतर फिट होंगे।

अमेरिकी और ब्रिटेन की माप पर बनते हैं कपड़े

बता दें, इस समय भारत में उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ब्रांड छोटे, मध्यम और बड़े साइज वाले कपड़ों के लिए अमेरिका या ब्रिटेन के माप का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, पश्चिमी शारीरिक संरचना में ऊंचाई, वजन या शरीर के अंगों की विशिष्ट माप भारतीयों से अलग होती है, जिसके चलते कभी-कभी उन्हें फिटिंग संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बहुत जल्द लॉन्च होगा भारतीय मानक

कपड़ा सचिव रचना शाह ने कहा, हम उम्मीद कर रहे हैं कि भारतीय मानक जल्द ही लॉन्च होगा। उन्होंने कहा, सरकार का लक्ष्य घरेलू तकनीकी कपड़ा क्षेत्र को अगले पांच वर्षों में 40-50 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाना है, जो इस समय 22 अरब अमेरिकी डॉलर का है। शाह ने कहा, तकनीकी वस्त्रों का हमारा निर्यात इस समय 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर है। हमारा मकसद इसे पांच वर्षों में बढ़ाकर 10 अमेरिकी डॉलर करना है।

(भाषा इनपुट के साथ)

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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