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दिल्ली में चीफ सेक्रेटरी की नियुक्ति पर 'आप' और 'केंद्र' में खींचतान, सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया सुलह का रास्ता

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 24, 2023, 04:51 PM IST

Delhi Chief Secretary: सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता सुझाते हुए कहा है कि दिल्ली में चीफ सेक्रेटरी की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार सक्षम अधिकारियों के नाम पैनल को सुझाए, जिसके बाद दिल्ली सरकार को उनमें से एक नाम मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए चुनना होगा।

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सुप्रीम कोर्ट

Photo : BCCL

Delhi Chief Secretary: राजधानी दिल्ली में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर से केंद्र और केजरीवाल सरकार आमने-सामने हैं। केजरीवाल जिस अधिकारी की नियुक्ति चाहते हैं, उस पर एलजी को आपत्ति है और एलजी के पसंदीदा अधिकारी केजरीवाल को पसंद नहीं हैं। ऐसे में यह विवाद तब सामने आया है, जब इसी महीने 30 नवंबर को दिल्ली के चीफे सेक्रेटरी नरेश कुमार रिटायर हो रहे हैं।

ऐसे में दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि केंद्र दिल्ली सरकार की सहमति के बिना नए चीफ सक्रेटरी की नियुक्ति न करे और न ही नरेश कुमार को सेवा विस्तार दे। ऐसे में सु्प्रीम कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए बीच का रास्ता सुझाया है।

केंद्र सुझाए नाम, दिल्ली सरकार करे तय

सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता सुझाते हुए कहा है कि दिल्ली में चीफ सेक्रेटरी की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार सक्षम अधिकारियों के नाम पैनल को सुझाए, जिसके बाद दिल्ली सरकार को उनमें से एक नाम मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए चुनना होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक बात जरूर साफ की है कि केंद्र की ओर से सुझाए गए नाम सार्वजनिक नहीं होने चाहिए। ऐसा करने से उन अधिकारियों के करियर पर गलत प्रभाव पड़ेगा। अब केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार तक कोर्ट के सामने अधिकारियों के नाम रखे जाने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल क्यों नहीं निकालते हल

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाद को हल करने के लिए दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल बैठकर इसका हल क्यों नहीं निकालते हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 नवंबर की तारीख दी है। वहीं दिल्ली सरकार ने इस मामले में कहा है कि दिल्ली में चीफ सेक्रेटरी की नियुक्त हमेशा दिल्ली सरकार ही करती है। ऐसे में एलजी का यह एकतरफा फैसला है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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