विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग उज्जैन महाकाल धाम में गर्भगृह में VIP के प्रवेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी मांग मंदिर प्रशासन के सामने रखने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि महाकाल के सामने कोई भी VIP नहीं है।
गर्भगृह में कौन जाएंगा, इसका फैसला किसके पास?
कोर्ट ने कहा कि मंदिर केगर्भगृह मे कौन जाएगा कौन नहीं? ये फैसला अदालते क्यों करें, आप मंदिर प्रशासन से अपनी बात रख सकते है। अगस्त 2025 को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी इस याचिका खारिज करते हुए कहा था कि गर्भ गृह में कौन प्रवेश कर सकता है और कौन नहीं? इसको तय करने का अधिकार उज्जैन के जिला अधिकारी और महाकाल मंदिर के प्रशासक की है।
मंदिर प्रशासन पर आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि महाकाल दर्शन मे इस तरह के नियम समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। गर्भ गृह में प्रवेश बीते ढाई वर्षों से बंद है, लेकिन इस बीच आरोप है कि नियमों को ताक पर रख वीआईपी एंट्री दी जाती है। उनका कहना था कि यह नियम संविधान के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन करता है। याचिका में ये भी कहा गया है कि मंदिर समिति जिसकी स्थापना महाकाल अधिनियम 1982 के तहत की गई थी। उसको इस तरह का कोई विशेषाधिकार नहीं दिया गया कि वो दर्शन के लिए VIP लोगों की एक अलग से कैटेगरी बनाए। या फिर राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों या पैसेवाले प्रभावशाली लोगों के लिए अलग से दर्शन की व्यवस्था करे।
अब आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता को मंदिर प्रशासन से बातचीत करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आंतरिक नियमों और प्रबंधन में अदालत का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। इस फैसले से मंदिर प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वह नियमों को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लागू करे।
