'लगता है खरीदारों की बजाय बिल्डरों की कर रही मदद' सुप्रीम कोर्ट ने RERA की कार्यप्रणाली पर जताई सख्त नाराजगी
- Authored by: गौरव श्रीवास्तव
- Updated Feb 12, 2026, 12:47 PM IST
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, सभी राज्यों को यह सोचना चाहिए कि RERA संस्था आखिर किसके लिए बनाई गई थी। आज हाल यह है कि यह सिर्फ डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों को राहत देने का काम कर रही है। आम खरीदारों को कोई फायदा नहीं मिल रहा।
SC ने RERA पर उठाए गंभीर सवाल
Supreme Court On RERA: सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी RERA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह संस्था अपने मूल मकसद से भटक गई है और खरीदारों की बजाय बिल्डरों की मदद करती नजर आती है। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि अब राज्यों को इस संस्था को बनाए रखने या खत्म करने पर गंभीरता से सोचना चाहिए। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने हिमाचल प्रदेश सरकार बनाम नरेश शर्मा मामले की सुनवाई के दौरान की।
CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, सभी राज्यों को यह सोचना चाहिए कि RERA संस्था आखिर किसके लिए बनाई गई थी। आज हाल यह है कि यह सिर्फ डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों को राहत देने का काम कर रही है। आम खरीदारों को कोई फायदा नहीं मिल रहा। बेहतर होगा कि इस संस्था को ही खत्म कर दिया जाए। कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देशभर में RERA को लेकर आम लोगों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। कई मामलों में घर खरीदारों का कहना है कि RERA से राहत मिलने की बजाय उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझा दिया जाता है।
मामला हिमाचल प्रदेश RERA ऑफिस से जुड़ा
यह मामला हिमाचल प्रदेश सरकार के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें राज्य सरकार ने RERA का मुख्य कार्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस फैसले को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी और हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार ने बिना वैकल्पिक कार्यालय स्थान तय किए ही RERA को शिफ्ट करने का फैसला लिया, जिससे संस्था का कामकाज ठप हो सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश में क्या कहा गया था?
हाईकोर्ट ने कहा था कि 13 जून 2025 के नोटिफिकेशन पर आगे आदेश तक रोक रहेगी। साथ ही, जिन 18 आउटसोर्स कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित करने का निर्देश दिया गया था, उससे RERA का कामकाज पूरी तरह प्रभावित होगा। हाईकोर्ट की राय थी कि इस तरह के फैसले से नियामक संस्था का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा और इससे आम लोगों को नुकसान होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल दिया
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश में दखल देते हुए राज्य सरकार को RERA ऑफिस शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि RERA की अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जाए। बेंच ने कहा कि इस बदलाव से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिन लोगों के मामले RERA के सामने लंबित हैं, उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो।
आम खरीदारों की परेशानी पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि RERA की स्थापना का मकसद घर खरीदारों को समय पर घर दिलाना और उनकी शिकायतों का त्वरित समाधान करना था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल उलट नजर आती है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि आज हाल यह है कि बिल्डर प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ देते हैं, सालों तक कब्जा नहीं देते और खरीदार RERA के चक्कर काटते रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें ठोस राहत नहीं मिलती।
RERA कानून का मूल उद्देश्य क्या था?
RERA कानून 2016 में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाना, घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना और बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगाना था। इस कानून के तहत हर राज्य में एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई गई थी, जहां खरीदार अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह उम्मीद की गई थी कि इससे फ्लैट खरीदारों को जल्दी न्याय मिलेगा और प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे।
कोर्ट का सवाल, क्या RERA अपने मकसद में सफल रही?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अब यह देखने की जरूरत है कि क्या RERA अपने मूल मकसद में सफल रही है या नहीं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर कोई संस्था सिर्फ बिल्डरों की सुविधा का माध्यम बन जाए और खरीदारों को राहत न मिले, तो उसके अस्तित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बेंच ने यह भी कहा कि राज्यों को आत्ममंथन करना चाहिए कि RERA जैसी संस्थाओं से जनता को वाकई फायदा हो रहा है या नहीं।
राज्य सरकार की ओर से क्या कहा गया?
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दिवान ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि RERA कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने का फैसला प्रशासनिक सुविधा और बेहतर कामकाज के लिए लिया गया था। सरकार का उद्देश्य संस्था को कमजोर करना नहीं बल्कि उसकी पहुंच बढ़ाना था। उन्होंने यह भी कहा कि अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी साथ में शिफ्ट किया जा रहा है ताकि लोगों को अलग अलग जगह न भटकना पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को RERA और उसकी अपीलीय ट्रिब्यूनल दोनों को धर्मशाला शिफ्ट करने की अनुमति दे दी। साथ ही कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आम लोगों को इस बदलाव से किसी तरह की परेशानी न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानांतरण के दौरान संस्था का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए और शिकायतों की सुनवाई नियमित रूप से जारी रहनी चाहिए।
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