Supreme Court to EC: बिहार चुनाव में अब थोड़ा ही समय बचा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (Election Commission) से बिहार में मतदाता की पहचान के लिए आधार को दस्तावेज मानने को कहा है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से बिहार में मतदाताओं की पहचान स्थापित करने के लिए आधार को 12वें निर्धारित दस्तावेज के रूप में मानने को कहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से बिहार में मतदाताओं की पहचान स्थापित करने के लिए दिखा जाने वाले आधार की वास्तविकता पर ध्यान देने के लिए कहा है।
चुनाव आयोग आवश्यक निर्देश जारी
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से बिहार में आधार को स्वीकार करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने पर विचार करने को कहा। भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि केवल वास्तविक नागरिकों को ही मतदान करने की अनुमति होगी। इस बात का ध्यान रखें। जाली दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक होने का दावा करने वालों को इससे बाहर रखा जाए।
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के नोट पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD), AIMIM और अन्य याचिकाकर्ताओं जैसे राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर विचार करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया है। दरअसल, आयोग ने कहा था कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.5 प्रतिशत ने SIR प्रक्रिया में अपनी पात्रता के दस्तावेज दाखिल किए थे। वहीं, मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
