जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के तलाक को मंजूरी दे दी है। अदालत के इस फैसले के बाद अब दोनों का 31 साल पुराना वैवाहिक संबंध आधिकारिक रूप से खत्म हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते को स्वीकार करते हुए विवाह समाप्त करने पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करेगी।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह फैसला दिया। पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दाखिल संयुक्त आवेदन को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा और उसी के आधार पर मामले का निस्तारण किया जाएगा।
वहीं, उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद सुलझ चुके हैं और 22 जुलाई को अनुच्छेद 142 के तहत तलाक की संयुक्त अर्जी दाखिल की गई है। उन्होंने अदालत से कहा कि दोनों ने अब आजादी को स्वीकार कर लिया है। सभी विवाद खत्म हो चुके हैं।
सनद रहे कि सुप्रीम कोर्ट उमर अब्दुल्ला की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने पत्नी के खिलाफ क्रूरता (Cruelty) के आधार पर तलाक की मांग की थी। इससे पहले जुलाई 2024 में शीर्ष अदालत ने इस मामले में पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अपील
इससे पहले 12 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक की अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने 2016 के फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि उमर अपनी पत्नी के खिलाफ क्रूरता और परित्याग (Desertion) के आरोप साबित करने में असफल रहे हैं। उससे पहले फैमिली कोर्ट ने भी 30 अगस्त 2016 को उनकी तलाक की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि प्रस्तुत साक्ष्य तलाक देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
2009 से अलग रह रहे थे दोनों
बता दें कि उमर अब्दुल्ला ने अपनी याचिका में कहा था कि उनका विवाह पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने दावा किया था कि वर्ष 2007 के बाद से दोनों के बीच वैवाहिक संबंध नहीं रहे और 2009 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। दोनों की शादी 1 सितंबर 1994 को हुई थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि पत्नी के व्यवहार के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
भरण-पोषण को लेकर भी हुआ था विवाद
इतना ही नहीं, अगस्त 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल अब्दुल्ला को 1.5 लाख रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इसके अलावा दोनों बेटों की शिक्षा के लिए 60-60 हजार रुपये प्रति माह देने को भी कहा गया था। यह आदेश उस अपील पर आया था, जिसमें पायल अब्दुल्ला और उनके बेटों ने 2018 के निचली अदालत के अंतरिम भरण-पोषण आदेश को चुनौती दी थी।
