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Vande Bharat Express Train पर फिर पथराव, अब कर्नाटक में फेंके गए पत्थर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 5, 2023, 07:40 PM IST

Vande Bharat Stone Pelting: भारतीय रेलवे के मुताबिक, बेंगलुरू-धारवाड़ वंदे भारत एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया, ट्रेन नंबर 20661 (बेंगलुरु-धारवाड़) वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर सुबह 08.40 बजे पत्थरबाजी की गई।

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वंदे भारत पर पथराव

Photo : BCCL

Vande Bharat Stone Pelting: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पथराव की घटना रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर से ऐसी ही एक घटना सामने आई है। भारतीय रेलवे के मुताबिक, इस बार बेंगलुरू-धारवाड़ वंदे भारत एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया, ट्रेन नंबर 20661 (बेंगलुरु-धारवाड़) वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर सुबह 08.40 बजे पत्थरबाजी की गई।

रेलवे के मुताबिक, यह घटना तब हुई , जब कदुर स्टेशन से गुजरने के बाद ट्रेन कर्नाटक में कदुर-बिरूर खंड के बीच थी। इस दौरान कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा पथराव किया गया। इस घटना में ट्रेन या किसी यात्री को नुकसान की जानकारी नहीं दी गई है।

एक जुलाई को भी हुआ था पथराव

बता दें, इससे पहले एक जुलाई को भी कर्नाटक में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पथराव हुआ था। दोपहर साढ़े तीन से चार बजे के बीच दावणगेरे में ट्रेन पर पत्थरबाजी की गई थी। इस घटना में ट्रेन का सी-4 डिब्बा क्षतिग्रस्त हुआ था। इस मामले में आरपीएफ इस मामले में जांच कर रही है। इससे पहले भी वंदे भारत पर पथराव की खबरें आती रही हैं।

मैसूर-चेन्नई वंदे भारत पर भी चले थे पत्थर

बता दें, इससे पहेल 26 फरवरी को मैसूर-चेन्नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थरबाजी की गई थी। कृष्णराजपुरम-बेंगलुरू छावनी रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन पर पत्थर फेंके गए थे। गनीमत रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ था। बता दें, बीते दिनों आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले से भी ऐसी ही घटना सामने आई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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