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क्या न्यायिक निगरानी में SIT का होगा गठन? नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की जांच के लिए ओवैसी ने उठाई ये मांग

Stampede at New Delhi Railway Station: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मामले की जांच के लिए असदुद्दीन ओवैसी ने न्यायिक निगरानी में एसआईटी के गठन की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ये छिपाने की कोशिश कर रही है, जो वहां हुआ था। आपको बताते हैं कि उन्होंने इसके अलावा क्या कुछ कहा।

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ पर ओवैसी ने न्यायिक निगरानी में एसआईटी के गठन की मांग की।

Owaisi raised questions on Modi government: ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की घटना पर शोक व्यक्त करते हुए इस त्रासदी की न्यायिक निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की।

ओवैसी ने न्यायिक निगरानी में एसआईटी के गठन की मांग की

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात मची भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। प्लेटफॉर्म संख्या 14 और 15 पर प्रयागराज (जहां महाकुंभ का आयोजन किया गया है) जाने वाली ट्रेन में सवार होने के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी जिसके बाद वहां भगदड़ मच गई। हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने भारतीय रेलवे की ‘‘प्रणालीगत विफलताओं’’ की स्वतंत्र जांच कराए जाने की भी मांग की।

मोदी सरकार पर ओवैसी ने लगाए गंभीर आरोप, उठाए सवाल

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, 'नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में मारे गए लोगों के प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। यह ऐसी त्रासदी है जिसे रोका जा सकता था।' ओवैसी ने कहा, 'जो कुछ हुआ, भाजपा सरकार उसे छिपाने की कोशिश कर रही है। इसके बजाय यह किया जाना चाहिए: 1. त्रासदी की जांच के लिए एक स्वतंत्र, न्यायिक निगरानी वाली एसआईटी गठित की जानी चाहिए 2. भारतीय रेलवे की प्रणालीगत विफलताओं की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए।'

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे लाखों भारतीयों की जीवनरेखा है और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के ‘‘कुप्रबंधन’’ की जद में नहीं आनी चाहिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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