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फफक कर रोने लगे सपा सांसद अवधेश प्रसाद, अयोध्या में 3 दिन से लापता लड़की का शव मिलने पर हुए भावुक

MP Awadhesh Prasad Breaks Down: यूपी के अयोध्‍या में पुलिस ने एक लापता युवती का निर्वस्‍त्र शव एक दिन पहले बरामद किया। जिसके बाद रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद भावुक हो गए। मंच पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही वो फफक कर रोने लगे। इस रिपोर्ट में वीडियो देखिए।

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सपा सांसद अवधेश प्रसाद भावुक हो गए।

Ayodhya News: अयोध्या में 3 दिन से लापता एक लड़की का शव खेत में मिलने की घटना पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सपा सांसद अवधेश प्रसाद भावुक हो गए। समाजवादी पार्टी के सांसद फफक-फफक कर रोने लगे। उन्होंने ये भी दावा किया कि अगर न्याय नहीं मिलेगा तो वो संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे।

'अगर न्याय नहीं मिला तो मैं सदन से इस्तीफा दे दूंगा'

लोकसभा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "मुझे लोकसभा जाने दीजिए, मैं प्रधानमंत्री मोदी से बात करूंगा। अगर न्याय नहीं मिला तो मैं सदन से इस्तीफा दे दूंगा। हम बेटियों की सुरक्षा करने में विफल हो रहे हैं।"

योगी के मंत्री बोले- मगरमच्छ के आंसू बहा रहे सपा सांसद

अयोध्या में 3 दिन से लापता एक लड़की का शव खेत में मिलने की घटना पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद के भावुक होने पर यूपी के मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा, "वह सिर्फ मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं।"

अयोध्या में दलित युवती की नृशंस हत्या, आंखें निकालीं

उत्तर प्रदेश के अयोध्‍या जिले में पुलिस ने अनुसूचित जाति (एससी) की लापता युवती का शनिवार को निर्वस्‍त्र शव बरामद किया, जिसकी बेरहमी से हत्या कर आंखें निकाल ली गई थीं और शरीर पर कई जख्म दिए गए थे। पुलिस ने युवती के साथ सामूहिक बलात्‍कार के बाद उसकी हत्या किए जाने का अंदेशा जताया है। अयोध्या के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) आशुतोष तिवारी ने को बताया, '22 साल की एक युवती की गुमशुदगी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज की। शनिवार सुबह युवती का निर्वस्त्र शव बरामद हुआ। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।'

सूत्रों के मुताबिक, शव भयावह स्थिति में था, जिसे देखकर मृत युवती की बड़ी बहन और गांव की दो महिलाएं बेहोश हो गईं। उन्होंने बताया कि युवती बृहस्पतिवार रात 10 बजे किसी धार्मिक आयोजन में जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी, जिसके बाद परिजनों ने गांव में उसकी तलाश की। सूत्रों के अनुसार, परिजनों ने शुक्रवार को अयोध्या थाने में युवती की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस युवती की सक्रियता से तलाश करने के बजाय महज खानापूर्ति कर रही थी। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह युवती के जीजा को उसका शव गांव से आधा किलोमीटर दूर छोटी नहर में मिला। उसने शव मिलने की जानकारी परिवार को दी, जिसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई।

परिजनों के मुताबिक, युवती की आंखें निकाल ली गई थीं और उसके शरीर की कई हड्डियां भी टूटी हुई पाई गईं। उन्होंने युवती की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का संदेह जताया। परिजनों ने बताया कि युवती का शव निर्वस्त्र अवस्था में मिला था, उसकी आंखें निकाल ली गई थीं, हाथ-पैर रस्सी से बांधे गए थे और चेहरे व कपाल पर गंभीर जख्म के निशान थे। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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