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'वंदे मातरम' का किसने किया अपमान? समाजवादी पार्टी के इस विधायक ने उठाया मुद्दा; जानें पूरा विवाद

UP Politics: सपा के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह ने 'वंदे मातरम' का मुद्दा उठाया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष का कार्रवाई का भरोसा दिया। सिंह ने अध्यक्ष से मांग की कि सीसीटीवी फुटेज निकालकर ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाना चाहिए। उन्होंने मामले का ब्यौरा देते हुए कहा कि कल राज्यपाल के भाषण के बाद सदन स्थगित हो गया और फिर साढ़े 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई।

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सपा के बागी विधायक ने लगाया वंदे मातरम गीत का अपमान करने का आरोप।

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह ने कुछ सदस्यों पर वंदे मातरम गीत का अपमान करने का आरोप लगाया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि कोई भी सदस्य हो, सभी का नैतिक दायित्व है कि वे राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत का सम्मान करें। उन्होंने कहा,'जो जरूरी कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।'

वंदे मातरम के दौरान सोफे पर बैठे थे करीब 10 सदस्य

विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन बुधवार को राकेश प्रताप सिंह ने शून्यकाल में यह मामला उठाया। सिंह ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद मंगलवार को जब दोबारा सदन की शुरुआत हुई और वंदे मातरम का गान हो रहा था, तब (विपक्ष की ओर के सुविधा कक्ष में) करीब 10 सदस्य सोफे पर बैठे थे। उन्होंने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी के सदस्यों पर तंज कसते हुए कहा कि हाथ में संविधान की प्रति लेकर घूमने वाले लोग अगर इस तरह का आचरण करते हैं, तो जांच कराकर कार्रवाई की जानी चाहिए।

विधायक का दावा- सीसीटीवी लगा है और सब दिख जाएगा

राकेश प्रताप सिंह ने अध्यक्ष से मांग की कि सीसीटीवी फुटेज निकालकर ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाना चाहिए। सिंह ने मामले का ब्यौरा देते हुए कहा कि कल राज्यपाल के भाषण के बाद सदन स्थगित हो गया और फिर साढ़े 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई। उनका कहना था कि एक व्यवस्था रही है कि राज्यपाल (अभिभाषण के लिए) आएंगी तो जन गण मन का गान होगा और विधानसभा अध्यक्ष पीठ पर आएंगे तो वंदेमातरम गीत होगा।

उन्होंने अध्यक्ष से कहा, 'जब आप सदन में आये और राष्ट्रगान शुरू हुआ तो उस समय मैं गेट तक आ गया था, वहीं खड़े होकर वंदे मातरम गीत गाने लगा लेकिन यह दुर्भाग्य है कि कुछ चुने हुए लोग, जो न संविधान की मर्यादा समझते हैं और न ही लोकतंत्र की व्यवस्था का सम्मान करते हैं, सोफे पर बैठे थे।' इस बीच जब एक सदस्य ने टोका कि सदस्यों का नाम सार्वजनिक करिए, तो सिंह ने कहा,'यह परंपरा नहीं रही है, लेकिन अध्यक्ष कहेंगे तो मैं नाम भी बता दूंगा।' सिंह ने कहा कि यहां सीसीटीवी लगा है और सब दिख जाएगा।

अतुल प्रधान ने सत्‍ता पक्ष की लॉबी की ओर किया इशारा

उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज की जांच कर ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बीच सपा सदस्य अतुल प्रधान ने सत्‍ता पक्ष की लॉबी की ओर इशारा करते हुए कहा कि उधर का (सीसीटीवी फुटेज) भी दिखवा लीजिए। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्‍ना ने कहा कि यह सूचना बहुत दुखद है। उन्होंने कहा, 'यह हम सभी को पता है कि जन गण मन या वंदे मातरम गीत हो तो हमें कैसा आचरण करना है।'

उन्होंने तंज किया कि यह निर्भर करता है कि लोग किस संस्कार और परंपरा से आ रहे हैं। खन्‍ना ने इसे निंदनीय करार देते हुए कहा, 'हम चाहते हैं कि ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाए और उन पर कार्रवाई हो।' सपा विधायक राकेश सिंह ने पिछले वर्ष राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े दिखे थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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