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संसद में सोनिया गांधी तय कर रही थीं राहुल का ट्रैक, जब-जब किया इशारा तब-तब तेवर हुए गर्म

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 10, 2023, 09:44 AM IST

NO- Confidence Motion: ​संसद में राहुल के बदले हुए अवतार को भले ही पूरे देश ने देखा हो, लेकिन इसके पीछे मास्टरमाइंड उनकी मां सोनिया गांधी ही थीं, जो राहुल के चढ़ते-उतरते तेवरों का ट्रैक सेट कर रही थीं। सोनिया गांधी यह सुनिश्चित करती हुई देखी गईं कि राहुल के भाषण पर कोई विवाद न हो और यह एक सही नोट पर खत्म हो।

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सोनिया गांधी और राहुल गांधी

Photo : ANI

NO- Confidence Motion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए राहुल गांधी कल संसद पहुंचे थे। उन्होंने लोकसभा की सदस्यता बहाल होने के बाद पहली बार संसद की चर्चा में भाग लिया। इस दौरान राहुल गांधी काफी आक्रामक नजर आए और मोदी सरकार पर तीखे वार भी किए।

राहुल गांधी ने मणिपुर हिंसा पर यह कहने में भी गुरेज नहीं किया कि मणिपुर में भारत माता की हत्या की गई है। उनके इस बयान पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति भी जताई और लोकसभा की कार्यवाही से उनके भाषण के इस अंश को भी हटा दिया गया। कल संसद में राहुल के इस बदले हुए अवतार को भले ही पूरे देश ने देखा हो, लेकिन इसके पीछे मास्टरमाइंड उनकी मां सोनिया गांधी ही थीं, जो राहुल के चढ़ते-उतरते तेवरों का ट्रैक सेट कर रही थीं।

राहुल के भाषण के दौरान एक्टिव मोड में दिखीं सोनिया

अविश्वास प्रस्ताव पर जब राहुल गांधी बहस कर रहे थे, तब सोनिया गांधी एक्टिव मोड में दिखाई दीं। राहुल के आगे की पंक्ति में बैठी सोनिया गांधी इशारों ही इशारों में ताकीद कर रही थीं और उन्हें दिशानिर्देश भी देती नजर आईं। पूरे भाषण के दौरान सोनिया गांधी यह सुनिश्चित करती हुई देखी गईं कि राहुल के भाषण पर कोई विवाद न हो और यह एक सही नोट पर खत्म हो।

शुरुआत से अंत तक इशारों में की बात

एक रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने जब अपना भाषण देना शुरू किया, तब सोनिया गांधी ने ही उन्हें लोकसभा अध्यक्ष को संबोधित करने का इशारा किया। इसके बाद राहुल ने अपने भाषण की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष से माफी मांगते हुए की, जिसमें उन्होंने पुराने भाषण का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि मेरे पिछले भाषण से आपको दुख हुआ था, इसके लिए मैं माफी मांगता हूं। इसके बाद राहुल गांधी जब अपने भाषण के अंत में पहुंचे तो सोनिया गांधी के इशारे पर ही पीएम मोदी और गौतम अडानी की तस्वीर दिखाई और फिर उसे अपने पास रख लिया।

INDIA सांसदों को भी किया कंट्रोल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भाषण के दौरान जब विपक्षी गठबंधन के सांसद वेल में थे तो सोनिया गांधी ने ही इशारा करके कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी से आक्रामकता बढ़ाने को कहा था। वहीं जब टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भाजपा सांसदों पर आक्रामक हुईं तो सोनिया के इशारे के बार नजारा बदल गया और विपक्षी सांसद अपनी-अपनी सीट पर लौट आए।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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