Signature Forgery Case: बंगाल में कथित “सिग्नेचर फर्जीवाड़ा” मामला लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले की वजह से टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में सोमवार शाम सीआईडी (CID) ने एक मामले की जांच के सिलसिले में अभिषेक बनर्जी को दूसरा नोटिस दिया है। इस नए समन के जरिए जांच एजेंसी ने उन्हें आगामी 8 जून (सोमवार) को दोपहर 12:00 बजे कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय, भवानी भवन में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
इससे पहले शनिवार दोपहर हरीश मुखर्जी रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। हालांकि अधिकारियों को घर का मुख्य दरवाजा बंद मिला। काफी देर तक इंतजार और दरवाजा खटखटाने के बाद घर के अंदर से एक व्यक्ति बाहर आया। उसने अधिकारियों को बताया कि अभिषेक बनर्जी इस समय घर पर मौजूद नहीं हैं।
क्या है मामला?
मामला है कि ‘शोभनदेब चटर्जी’ को विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें कई सिग्नेचर ‘फर्जी’ पाए गए। तृणमूल कांग्रेस को शोभनदेब चटर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के लिए 70 विधायकों के सिग्नेचर की जरूरत थी। जैसे ही यह प्रस्ताव खड़ा हुआ, कई विधायकों ने यह दावा किया कि उन्होंने उस पर साइन नहीं किया था।
6 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने जीते हुए विधायकों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायकों ने ममता को यह तय करने की जिम्मेदारी दी कि किसे विधायक दल का नेता और अन्य पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
विवाद उस चिट्ठी को लेकर है, जिसके जरिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) बनाए जाने का समर्थन दिखाया गया था। आरोप है कि इस चिट्ठी में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर ऐसे लगाए गए, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने उस दस्तावेज पर साइन ही नहीं किए थे या उस समय मौजूद नहीं थे। आसान भाषा में कहें तो विवाद इस बात पर है कि विपक्ष के नेता के समर्थन वाले दस्तावेज में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर असली थे या नहीं।
टीएमसी ने दो विधायकों को किया निष्कासित
बता दें कि टीएमसी ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। दोनों ने कथित तौर पर शिकायत की कि उनके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है। वहीं, निष्कासित नेता संदीपान साहा ने इस मामले में ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विधायकों की सूची पर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ही हस्ताक्षर किए थे। वहीं, विधायक बहारुल इस्लाम ने स्वीकार किया कि 6 मई को वह बैठक में थे ही नहीं, फिर भी उनका हस्ताक्षर वहां मौजूद था।
