शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना को लेकर महाराष्ट्र में सियासी विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पुणे में कांग्रेस भवन के पास भाजपा के प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पथराव किया, जिसमें नौ लोग घायल हो गए। घायलों में तीन कांग्रेस कार्यकर्ता, दो भाजपा कार्यकर्ता, दो पुलिसकर्मी और दो मीडियाकर्मी शामिल हैं।
कैसे हुई विवाद की शुरुआत
इस विवाद की शुरुआत बीते दिन कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल द्वारा दिए गए उस बयान से हुई,जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के 'समकक्ष'बताया था। उन्होंने कहा था कि जैसे शिवाजी महाराज ने ‘स्वराज’की अवधारणा के साथ संघर्ष किया,उसी तरह टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
संयुक्त पुलिस आयुक्त रंजन कुमार शर्मा ने बताया कि नारेबाजी के बीच दोनों पक्षों के कार्यकर्ता दीवारों पर चढ़ गए और पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित की और दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भाजपा की पुणे इकाई के अध्यक्ष धीरज घाटे ने सपकाल के खिलाफ पर्वती थाने में शिकायत दर्ज कराई,जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले पथराव किया- कांग्रेस
कांग्रेस की पुणे शहर इकाई के अध्यक्ष अरविंद शिंदे ने कहा कि पार्टी ने भाजपा पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि महापौर मंजुषा नागपुरे,भाजपा की शहर इकाई के अध्यक्ष धीरज घाटे,दुष्यंत मोहोल और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। सपकाल की टिप्पणियों के विरोध में कांग्रेस भवन के पास भाजपा के प्रदर्शन के मद्देनजर वहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले पथराव किया। कांग्रेस नेता मोहन जोशी ने कहा कि पार्टी इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शिवाजीनगर थाने के बाहर धरना दे रही है।
भाजपा पर 'दोहरे मापदंड'अपनाने का आरोप
इस बीच कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने भाजपा पर 'दोहरे मापदंड'अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अतीत में भाजपा नेताओं ने टीपू सुल्तान की प्रशंसा की थी,लेकिन अब राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सावंत ने अपने बयान में दावा किया कि भाजपा पहले टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती थी,लेकिन अब ध्रुवीकरण के अपने एजेंडे के तहत उन्हें बुरा बताती है। उन्होंने कहा कि इस पाखंड को क्या नाम दिया जाए? टीपू सुल्तान भगवान राम के नाम वाली अंगूठी पहनते थे।
सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक विभाजन पैदा करने की रणनीति के तहत टीपू सुल्तान को नकारात्मक रूप में पेश कर रही है,जबकि पहले पार्टी नेताओं ने उनकी प्रशंसा की थी। 2012 में भाजपा ने अकोला महानगरपालिका में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें स्थायी समिति हॉल का नाम ’शहीद-ए-वतन शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान’रखने की बात कही गई थी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने टीपू सुल्तान के मकबरे का दौरा किया था और आगंतुक पुस्तिका में उनकी प्रशंसा में अपने विचार लिखे थे। कांग्रेस नेता ने कहा कि 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कर्नाटक विधानसभा में टीपू सुल्तान की प्रशंसा की थी।
इतिहास की एक विवादास्पद हस्ती टीपू सुल्तान
टीपू सुल्तान इतिहास की एक विवादास्पद हस्ती हैं। जहां एक वर्ग अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी वीरता की तारीफ करता है। वहीं,दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार के लिए उनकी आलोचना करता है। इसके विपरीत,छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य प्रतिभा के साथ-साथ परोपकार और सामाजिक कल्याण पर आधारित प्रशासनिक कौशल के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।
