Shiv Sena MLA Verdict: महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शिवसेना के दोनों गुटों की अयोग्यता याचिकाओं पर अपना आदेश सुना दिया है। फैसला एकनाथ शिंदे के पक्ष में गया है। स्पीकर ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना है।
क्या बोले स्पीकर
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा- "दोनों पार्टियों (शिवसेना के दो गुटों) द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए संविधान पर कोई आम सहमति नहीं है। नेतृत्व संरचना पर दोनों पार्टियों के विचार अलग-अलग हैं। एकमात्र पहलू विधायक दल का बहुमत है। मुझे विवाद से पहले मौजूद नेतृत्व संरचना को ध्यान में रखते हुए प्रासंगिक संविधान तय करना होगा..."
फैसले का आधार
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि Rule 1986 के तहत पार्टी के संविधान में आनेवाले बदलावों को स्पीकर के समक्ष पेश कर जमा करना होता है। रिकॉर्ड के मुताबिक आज तक शिवसेना पार्टी ने उनके संविधान में किसी संशोधन का जिक्र, स्पीकर के समक्ष नही किया है। इसलिए संशोधित संविधान को यह स्थान नहीं दिया जा सकता। 2018 में जो लीडरशिप स्ट्रक्चर शिवसेना पार्टी का इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर मौजूद है, उसको मद्दे नजर रखते हुए असली शिवसेना का चुनाव किया गया है। असली और नकली शिवसेना में विरोधी (एकनाथ शिंदे) पक्ष ही असली शिवसेना घोषित हुआ। डेप्युटी स्पीकर के समक्ष भी पार्टी में दो हिस्से या अलगाव को लेकर किसी तरीके साक्षो को पेश नहीं किया गया था। शिवसेना पार्टी में लीडरशिप को लेकर 2013 और 2018 में कोई चुनाव नही हुए, जिसके चलते पार्टी की लीडरशिप को लेकर कोई स्पष्ट नाम नही है।
18 महीने का इंतजार खत्म
एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली शिवसेना गुटों की क्रॉस-याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला आज शाम पांच बजे के बाद घोषित किया गया। फैसला महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सुनाया। अयोग्यता याचिकाओं पर नार्वेकर का बहुप्रतीक्षित फैसला 18 महीने से अधिक समय बाद आया है जब शिवसेना को विभाजन का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ।
क्या बोले थे एकनाथ शिंदे
इससे पहले एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली शिवसेना गुटों की याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसले से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को गुणदोष के आधार पर अपना फैसला देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि निर्वाचन आयोग ने उनके संगठन को शिवसेना नाम और पार्टी के ‘धनुष और तीर’ निशान को बनाए रखने की अनुमति दी है।
34 याचिकाएं
54 विधायकों के खिलाफ दोनों पक्षों की ओर से 34 याचिकाएं दायर की गई थीं। उद्धव के गुट की याचिका में जून 2022 में उनके साथ विद्रोह करने वाले अन्य लोगों के साथ सीएम एकनाथ शिंदे को सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।
