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शिंदे का साइलेंट वॉर: विज्ञापन में फडणवीस को दिखाया नीचा, बाला साहेब भी नदारद

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 13, 2023, 03:03 PM IST

Maharashtra Politics: मुख्यमंत्री पद के लिए हुए एक सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र के 26.1 प्रतिशत लोग एकनाथ शिंदे को और 23.2 प्रतिशत लोग देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। इसमें लिखा है, यानी कि महाराष्ट्र के 49.3 प्रतिशत लोग फिर से इस जोड़ी को पसंद करने पर अपनी मुहर लगाते हैं।

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एकनाथ शिंदे व देवेंद्र फडणवीस

Photo : PTI

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मंगलवार को विभिन्न अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन जारी किया जिसका शीर्षक था, राष्ट्र में मोदी, महाराष्ट्र में शिंदे सरकार। एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए यह इश्तहार प्रकाशित किया गया है जिसमें शिंदे को मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस की तुलना में अधिक लोगों की पसंद वाला नेता दर्शाया गया है।

विज्ञापन में ऊपर शिवसेना का चुनाव चिह्न तीर-कमान है। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री शिंदे की तस्वीर हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस विज्ञापन में शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की कोई तस्वीर नहीं है जबकि पहले शिवसेना के हर इश्तहार में ठाकरे का चित्र प्रमुखता से होता था।

26.1% लोगों ने की पसंद शिंदे

विज्ञापन में कहा गया है, मुख्यमंत्री पद के लिए हुए एक सर्वे के अनुसार महाराष्ट्र के 26.1 प्रतिशत लोग एकनाथ शिंदे को और 23.2 प्रतिशत लोग देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं। इसमें लिखा है, यानी कि महाराष्ट्र के 49.3 प्रतिशत लोग फिर से इस जोड़ी को पसंद करने पर अपनी मुहर लगाते हैं। विज्ञापन में प्रस्तुत आंकड़े और दावे जी टीवी-मेट्राइज सर्वेक्षण के हवाले से दिये गये हैं। इसमें लिखा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की जोड़ी के महाराष्ट्र में किए गए जनकल्याण के प्रकल्पों ने उन्हें वर्तमान में एक सर्वेक्षण में सर्वोच्च स्थान दिलाया है। वहीं, विज्ञापन के मुताबिक, मतदान के सर्वे के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 30.2 प्रतिशत लोग और शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में) को 16.2 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं। यानी कि महाराष्ट्र के 46.4 प्रतिशत लोग भाजपा और शिवसेना की जोड़ी को ही फिर से सत्ता में चाहते हैं।

संजय राउत बोले- मोदी की शिवसेना

विज्ञापन पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा, पहले यह बालासाहेब की शिवसेना होती थी, लेकिन विज्ञापन ने स्थिति साफ कर दी है। अब यह मोदी-शाह की शिवसेना बन गयी है। विज्ञापन में बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर कहां है? प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने विज्ञापन को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कहा, हमेशा चुनाव परिणाम तय करते हैं कि मतदाताओं को कौन सी पार्टी या नेता पसंद है। पहले शिंदे कैबिनेट मंत्री के रूप में लोकप्रिय थे और अब मुख्यमंत्री के रूप में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। राज्य की जनता को फडणवीस, शिंदे और मोदी से बहुत अपेक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने राज्य स्तरीय नेता के तौर पर दो बार फडणवीस को तरजीह दी है। उन्होंने कहा, शिवसेना और भाजपा में ऐसी कोई तुलना नहीं है कि कौन बड़ी पार्टी है और कौन छोटी।

कांग्रेस ने बताया फर्जी सर्वेक्षण

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे ने इसे झूठा सर्वेक्षण करार दिया और कहा कि शिंदे ने अपने प्रचार के लिए इसका इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, चुनाव हो जाएं तो महा विकास आघाड़ी निश्चित रूप से महाराष्ट्र में 42 से अधिक लोकसभा सीटें और 200 से अधिक विधानसभा सीटें जीतेगी। उनके (शिंदे के) बारे में एक नई कहानी लिखी जाएगी कि एक समय कोई शिंदे होते थे....। शिंदे नीत शिवसेना के मुख्य सचेतक भरत गोगावाले ने कहा, हम अपने पक्ष में सर्वे कराने के लिए किसी के साथ समझौता नहीं करते। वह (शिंदे) जनता की पहुंच में हैं और राज्य के सभी क्षेत्रों का दौरा करते हैं। हमने किसी मीडिया संस्थान को हमारे लिए सर्वे करने को नहीं कहा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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