देश

पीएम मोदी ने शारदा सिन्हा के बेटे को किया फोन, कहा- बिलकुल मजबूती से कराएं इलाज

Sharda Sinha Heath Update: दिल्ली एम्स में भर्ती शारदा सिन्हा की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। उन्हें बीती रात वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध लोकगीत गायिका के बेटे को फोन कर उनकी मां के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी हासिल की। पीएम ने फोन पर क्या कुछ कहा, जानिए।

Image

पीएम मोदी ने शारदा सिन्हा के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।

PM Modi Enquired about The Sharda Sinha's Health: दिल्ली के एम्स में आईसीयू में भर्ती बिहार की प्रसिद्ध लोकगीत गायिका शारदा सिन्हा की तबीयत सोमवार शाम अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शारदा सिन्हा के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। पीएम मोदी ने शारदा सिन्हा के बेटे को फोन किया और उनसे उनकी मां के स्वास्थ्य के बारे में जाना।

पीएम मोदी ने शारदा सिन्हा के बेटे से क्या कुछ कहा?

शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमन सिन्हा को पीएम मोदी ने फोन किया और कहा कि बिलकुल मजबूती से इलाज कराएं। आज सुबह पीएम मोदी ने फोन कर शारदा सिन्हा का हालचाल जाना। छठ गीतों से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के आम लोगों के दिलों पर राज करने वाली लोकगायिका के बेटे अंशुमन सिन्हा ने अपने यूट्यूब चैनल पर बताया, "इस बार यह सच्ची खबर है, मां वेंटिलेटर पर हैं।"

उन्होंने लोगों से प्रार्थना जारी रखने की अपील करते हुए कहा, "बहुत बड़ी लड़ाई में मां जा चुकी हैं। और मुश्किल है, काफी मुश्किल है। इस बार काफी मुश्किल है। बस यही प्रार्थना कीजिए कि वह लड़कर बाहर आ सकें।"

पिछले कुछ दिनों से शारदा सिन्हा एम्स में हैं भर्ती

बेहद भावुक और रुआंसे अंशुमन ने कहा कि वह डॉक्टर से मिलकर आए हैं। उन्होंने बताया कि अचानक उनकी स्थिति बिगड़ी है। शारदा सिन्हा पिछले कुछ दिनों से एम्स में भर्ती हैं। उन्होंने वहीं से आस्था के महापर्व छठ का एक नया गीत 'दुखवा मिटाईं छठी मईया' का ऑडियो सॉन्ग रिलीज किया था। पद्म भूषण से सम्मानित 72 वर्षीय शारदा सिन्हा मैथिली और भोजपुरी गानों के लिए जानी जाती हैं। उनके चर्चित गानों में 'विवाह गीत' और 'छठ गीत' शामिल हैं। संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया है।

शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के समस्तीपुर में संगीत से जुड़े एक परिवार में हुआ था। उन्होंने 1980 में ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन से अपना करियर शुरू किया और जल्द ही अपनी दमदार आवाज और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए मशहूर हो गईं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article