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शरद पवार ने आखिर क्यों पीएम मोदी का आभार जताया? साथ ही कर दिया ये आग्रह; जानें पूरी बात

महाराष्ट्र की सियासत में कभी भी कुछ भी हो सकता है, इसका उदाहरण सभी ने देखा है। होली के एक दिन बाद शनिवार को शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। पवार ने पीएम मोदी से दिल्ली में मराठा साम्राज्य के योद्धाओं की प्रतिमाएं स्थापित करने का आग्रह किया।

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पीएम मोदी और शरद पवार। (पुरानी तस्वीर)

Sharad Pawar Expressed Gratitude to PM Modi: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से यहां तालकटोरा स्टेडियम में पेशवा बाजीराव प्रथम, महादजी शिंदे और मल्हारराव होलकर की अश्वारोही अवस्था वाली प्रतिमाएं स्थापित करने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

शरद पवार ने पीएम मोदी से किया ये आग्रह

तालकटोरा स्टेडियम के आसपास का क्षेत्र 18वीं शताब्दी में मुगलों के खिलाफ मराठा साम्राज्य द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियानों के संदर्भ में अत्यधिक महत्व रखता है। पवार ने कहा कि पुणे स्थित एक गैर सरकारी संगठन ने तालकटोरा स्टेडियम में बाजीराव, शिंदे और होलकर की प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना बनाई थी, लेकिन साहित्यकारों और इतिहासकारों ने तीनों योद्धाओं की अश्वारोही अवस्था वाली प्रतिमाएं स्थापित करने के पक्ष में अपनी राय रखी है।

उन्होंने मोदी को लिखे पत्र में कहा, 'हालांकि, कई साहित्यकारों और शुभचिंतकों ने यह भावना व्यक्त की है कि अश्वारोही अवस्था में पूर्ण आकार की प्रतिमाएं उनकी वीरता और योगदान के लिए अधिक उपयुक्त श्रद्धांजलि होंगी।'

पीएम मोदी का शरद पवार ने क्यों जताया आभार?

शरद पवार ने कहा कि चूंकि तालकटोरा स्टेडियम नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए वह प्रधानमंत्री से दिल्ली सरकार और एनडीएमसी को पूर्ण आकार की अश्वारोही अवस्था वाली प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमति प्रदान करने का निर्देश दिए जाने के वास्ते हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं।

तालकटोरा स्टेडियम 98वें मराठी साहित्य सम्मेलन का स्थल भी था जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया था। उन्होंने कहा, 'सरहद पुणे और अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल द्वारा आयोजित इस साहित्यिक उत्सव को आपके नेतृत्व में ऐतिहासिक महत्व प्राप्त हुआ।' पवार ने प्रधानमंत्री से कहा, 'आपके गहन और व्यावहारिक भाषण ने दुनिया भर के मराठी लोगों को काफी प्रभावित किया। उद्घाटन समारोह के दौरान मेरे प्रति आपके विशेष स्नेह को प्रदर्शित करने के लिए मैं वास्तव में आपका आभारी हूं।'

राकांपा (एसपी) के नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व हमेशा भारत के गौरवशाली अतीत को सम्मान देने और संरक्षित करने में सहायक रहा है तथा वह संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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