जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच दिनों से हो रही मुसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) लगातार दूसरे दिन भी यातायात के लिए पूरी तरह बंद है। बारिश और आपदा से जुड़ी घटनाओं में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 7 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले इस एकमात्र ऑल-वेदर 250 किलोमीटर लंबे राजमार्ग पर उधमपुर के जखानी से लेकर रामबन के बनिहाल के बीच कम से कम पांच स्थानों पर सड़क धंसने और मलबे के कारण रास्ता बंद हो गया है।
600 से अधिक वाहन फंसे, मुगल रोड चालू
हाइवे बंद होने की वजह से रामबन, नगरोटा, जम्मू, उधमपुर, लखनपुर और सांबा में 600 से अधिक गाड़ियां फंसी हुई हैं। हालांकि, पुंछ को कश्मीर से जोड़ने वाली मुगल रोड और लद्दाख को जोड़ने वाली श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी (SSG) रोड पर बारिश के बावजूद यातायात जारी है। प्रशासन और पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर यात्रियों को मौसम सुधरने और हाइवे साफ होने तक यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है। इसके अलावा डोडा-किश्तवाड़ मार्ग समेत एक दर्जन से अधिक अंतर-जिला सड़कें भी भूस्खलन की चपेट में आकर ठप हो चुकी हैं।
नदियां उफान पर, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
बारिश के कारण अखनूर में चेनाब नदी और जम्मू में तवी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है, जिससे कई घर और दुकानें जलमग्न हो गई हैं। पुंछ और राजौरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लापता 7 लोगों की तलाश के लिए SDRF, NDRF, पुलिस और सेना की टीमें तैनात की गई हैं।
आंकड़ों के मुताबिक रियासी में सबसे ज्यादा 119.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कटरा में 97.4 मिमी, रामबन में 71.5 मिमी और काजीगुंड में 73.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से क्षेत्र में बारिश का सिलसिला अभी जारी रह सकता है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
