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Senior Citizen Day: किडनी फेलियर से पीड़ित सभी बुजुर्गों के लिए डायलिसिस संभव नहीं

Senior Citizen Day: जिन लोगों ने डायलिसिस के लिए इंतजार किया, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत ने तीन साल तक डायलिसिस नहीं कराया।जिन्होंने तुरंत डायलिसिस शुरू कराई, वे इस प्रक्रिया के लिए न जाने वालों की तुलना में औसतन 9 दिन ज्यादा जीवित रहे लेकिन उन्हें अस्पताल में 13 दिन ज्यादा रहना पड़ा।

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किडनी फेलियर से पीड़ित सभी बुजुर्गों के लिए डायलिसिस संभव नहीं (प्रतीकात्मक फोटो- Pixabay)

Senior Citizen Day: एक रिसर्च के अनुसार किडनी फेलियर से पीड़ित बुजुर्गों के लिए डायलिसिस संभव नहीं है। बुजुर्गों के लिए यह काफी कठिन हो जाता है और कई मामलों में यह सफल भी नहीं होता है।

मौत का खतरा

एक शोध में यह बात सामने आई है कि किडनी फेलियर से पीड़ित कुछ वृद्धों के लिए डायलिसिस संभव नहीं हो सकता है। शोध में 75 या 80 वर्ष की आयु के लोगों के लिए इस प्रक्रिया में सावधानी बरतने की बात कही गई है। अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए शोध में कहा गया है कि अगर ऐसे मरीजों का डायलिसिस किया जाता है तो वह ज्‍यादा से ज्‍यादा एक सप्‍ताह तक जीवित रह पाएंगे। वहीं अगर वह अस्‍पातल में है तो वह दो सप्ताह या उससे अधिक दिन निकाल पाएंगे। इस वजह से यह प्रक्रिया किडनी फेलियर से पीड़ित वृद्धों के लिए ठीक नहीं है।

डायलिसिस के प्रभाव की जांच

पिछले रिकॉर्ड के आधार पर किए गए शोध में वृद्ध वयस्कों पर डायलिसिस के प्रभाव की जांच की गई। रैंडमाइज्ड क्‍लीनिकल ट्रायल (आरसीटी) की नकल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने रोगियों को दो समूहों में विभाजित किया। एक वह जिनका तुरंत डायलिसिस शुरू किया गया। वहीं दूसरे समूह को इसके लिए एक महीने तक इंतजार करना पड़ा।

क्या आया परिणाम

परिणामों से पता चला कि जिन लोगों ने डायलिसिस के लिए इंतजार किया, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत ने तीन साल तक डायलिसिस नहीं कराया।जिन्होंने तुरंत डायलिसिस शुरू कराई, वे इस प्रक्रिया के लिए न जाने वालों की तुलना में औसतन 9 दिन ज्यादा जीवित रहे लेकिन उन्हें अस्पताल में 13 दिन ज्यादा रहना पड़ा।

कई की हुई मौत

इसके अलावा, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के जिन रोगियों का तुरंत डायलिसिस शुरू किया गया, वे औसतन 60 दिन अधिक जीवित रहे, लेकिन उन्हें अस्पताल में 13 दिन अधिक बिताने पड़े। 65 से 79 वर्ष की आयु के जिन रोगियों ने तुरंत डायलिसिस शुरू कर दिया, वे औसतन 17 दिन से कम जीवित रहे, लेकिन उन्हें अस्पताल में 14 दिन अधिक बिताने पड़े।

क्या बोलते हैं शोधकर्ता

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की वरिष्ठ शोध इंजीनियर मारिया मोंटेज राथ ने कहा कि अध्ययन के अनुसार, जल्‍द डायलिसिस शुरू करने से जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इससे डायलिसिस की अवधि के साथ अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी बढ़ जाती है। टीम ने कहा, ''डायलिसिस को अक्सर जीवन और मृत्यु के बीच एक विकल्प के रूप में देखा जाता है, जिससे मरीज इसके फायदों और स्वास्थ्य लाभों को लेकर ज्यादा आश्वस्त दिखते हैं।''

सम्मान और सहानुभूति में निहित एक विजन

विश्व स्तर पर व्यवसाय बनाने के 15 वर्षों के अनुभव के साथ IIM अहमदाबाद की पूर्व छात्रा विभा सिंघल ने अकेलेपन को व्यक्तिगत रूप से करीब से देखा, और अपनी ऊर्जा को वरिष्ठ नागरिकों के भावनात्मक कल्याण में लगाने का फैसला किया। उनका विजन एक सुरक्षित स्थान बनाना है जहां वरिष्ठों की न केवल देखभाल की जाती है बल्कि उनका सही मायने में सम्मान किया जाता है, जो उनके लिए उचित प्यार और सम्मान को दर्शाता है। भारत में लगभग 45% वरिष्ठ नागरिक अकेलेपन का अनुभव करते हैं, सुकून अनलिमिटेड का लक्ष्य सेवाओं से कहीं अधिक प्रदान करना है - यह सार्थक बातचीत और एक सहायक समुदाय प्रदान करता है जहां वृद्धावस्था को सम्मान के साथ सम्मानित किया जाता है।

एजेंसी इनपुट के साथ

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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