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Seema Haider: क्या सीमा हैदर को मिलेगी भारत की नागरिकता? जानें क्या-क्या है विकल्प

Seema Haider on Indian Citizenship: मोहब्बत के लिए पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत आने वाली सीमा हैदर पर जासूसी के आरोप लगे हैं। इस बीच सीमा ने भारतीय नागरिकता की मांग की है। सीमा की तरफ से ये दलील पेश की गई है कि जब भारत में रहने के बाद अदनान सामी को भारतीय नागरिकता मिल गई थी, तो उसे भी नागरिकता मिलनी चाहिए। आपको इस रिपोर्ट में समझाते हैं कि भारत की नागरिकता कैसे मिलती है।

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सीमा हैदर ने भारतीय नागरिकता की मांग की।

Seema Haider News: पाकिस्तानी जासूस होने के आरोप में सीमा हैदर से जांच एजेंसियों ने पूछताछ की। अब सीमा ने भारतीय नागरिकता की मांग की है। उनके वकील एपी सिंह ने याचिका दायर किया है और यह दावा किया है कि अगर सिंगर अदनान सामी को पाकिस्तानी मूल का होने के बाद भारत में नागरिकता मिल सकती है, तो सीमा को क्यों नहीं? पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत आने वाली सीमा नोएडा के निवासी सचिन मीणा से मोहब्बत के दावे करती हैं। उनका कहना है कि वो भारत की नागरिकता हासिल करके सचिन के साथ जीना चाहती हैं। आपको हम ये समझाते हैं कि सीमा हैदर के पास भारतीय नागरिकता हासिल करने के क्या-क्या विकल्प हैं।

कैसे और किसे मिल सकती है भारत की नागरिकता?

भारतीय नागरिकता हासिल करने के कई सारे विकल्प होते हैं। अब यहां ये समझने की जरूरत है कि सीमा हैदर को किस तरीके से नागरिकता मिल सकती है। सीमा पर पाकिस्तानी जासूस होने के आरोप लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि यूपी एटीएस ने सीमा के सामने पूछताछ के दौरान जो सवाल रखे, उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिए। कई सवालों को उसने गोल-मोल घुमाया और कई बार वो रोने लगी। अगर सीमा को भारतीय नागरिकता हासिल करनी है, तो उसके पास क्या-क्या विकल्प हैं।

किसी भारतीय से शादी करनी होगी

यदि कोई भारतीय पुरुष किसी विदेशी महिला या लड़की से शादी करता है और अगर कोई भारतीय लड़की या लड़की किसी विदेशी पुरुष या लड़के से शादी करती है तो भारत की नागरिकता पाने के वे आवेदन कर सकते हैं। सीमा के लिए ये राह आसान नहीं है, क्योंकि कानून के मुताबिक सीमा को सचिन से शादी करने के लिए पहले अपने पति से तलाक लेना होगा। उसके बाद ही वो सचिन मीणा से शादी कर सकेगी।

भारत में 11 से 15 साल रहना होगा

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि भारत में कोई विदेशी 11 से 15 वर्ष से रह रहा हो, तो वो भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए योग्य होगा। इसमें अहम बात ये है कि उस विदेश की नागरिकता तभी मिलेगी, जब वो देश में गैर कानूनी तरीके से नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधानों के तहत आया हो। ऐसे में ये विकल्प भी सीमा के लिए वैध नहीं होगा।

सीएए के जरिए मिलती है नागरिकता

सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के मुताबिक भारत के पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक रहे रहे थे और उनका धर्म के आधार पर प्रताड़ना हो रहा हो, और वो शख्स 31 दिसम्बर 2014 से पहले भारत में आ गए थे तो ऐसे लोगों को भारत में नागरिकता दी जा सकती है। इसके जरिए भी सीमा हैदर को नागरिकता नहीं मिल सकती है।

सीमा का जन्म भारत में हुआ होता तो..

अगर सीमा का जन्म भारत में हुआ होता, तो संविधान के तहत उसे भारतीय नागरिकता मिल सकती था। जब भारत में संविधान को लागू हुआ, उस वक्त जितने लोग यहां मौजूद थे, उन्हें भारत की नागरिकता मिली।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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