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'रेवड़ी कल्चर' पर केंद्र, एमपी, राजस्थान, EC को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 4 सप्ताह में मांगा जवाब

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Oct 6, 2023, 12:59 PM IST

SC Notice To Center, EC On Freebies Culture: याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में चुनावों के दौरान नकद पैसे बांटने का आरोप लगाया है। साथ ही उसने कहा है कि राजनीतिक दल कर दाताओं के पैसे का इस्तेमाल 'रेवड़ी कल्चर' बांटने में कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों एवं चुनाव आयोग से अपना जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल करने के लिए कहा है।

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रेवड़ी कल्चर पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त।

Photo : PTI

SC Notice To Center, EC On Freebies Culture: चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले लोकलुभावन वादों पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख तेवर दिखाए हैं। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान सरकारों सहित चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में चुनावों के दौरान नकद पैसे बांटने का आरोप लगाया है। साथ ही उसने कहा है कि राजनीतिक दल कर दाताओं के पैसे का इस्तेमाल 'रेवड़ी कल्चर' को बढ़ावा देने में कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों एवं चुनाव आयोग से अपना जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल करने के लिए कहा है।

एमपी में कई गैर जरूरी घोषणाएं हुईं-वकील

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को 'मुफ्त की सुविधाएं' मामले में दाखिल दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ा है। इस मामले में वकील वरुण ठाकुर ने कहा कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री ने 27 हजार योजनाओं की घोषणाएं कर दी, लेकिन कई गैर जरूरी थे। हम चाहते हैं कि योजनाएं जनहित में बनें न कि चुनावी फायदे के उद्देश्य से। याचियाकर्ता बीएल जैन का कहना है कि मध्य प्रदेश का जितना बजट है, उससे 20 फीसदी ज्यादा कर्जा हो चुका है। हम चाहते हैं कि पहले राज्य की आर्थिक सेहत का ध्यान रखा जाए और सर्वे हो।

RBI को भी नोटिस

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला एवं जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक को भी नोटिस जारी किया है। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि वोटरों को लुभाने के लिए दो राज्य सरकारें कर दाताओं के पैसे का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी सामाजिक कार्यकर्ता भट्टूलाल जैन ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि वह राज्य सरकारों को निर्देश दे कि वे चुनावों से पहले पब्लिक फंड को मंजूरी न दें। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के वादों से 'कर दाताओं के पैसे की बर्बादी हो रही है।'

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