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INDIA गठबंधन टूट जाएगा या होगा एकजुट? अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद संजय राउत कर रहे बड़े-बड़े दावे

Opposition Alliance INDIA Future: क्या विपक्षी दलों का गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस में शामिल दलों का साथ टूट जाएगा? पिछले कुछ वक्त से ऐसा ही लग रहा है कि गठबंधन में पड़ी दरार अब टूट में बदलने वाली है। इसी बीच दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल से उद्धव ठाकरे के करीबी नेता संजय राउत ने मुलाकात की और कहा कि इंडिया गठबंधन अब ज्यादा एकजुट होगा।

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केजरीवाल से मुलाकात पर क्या बोले संजय राउत?

Future of Opposition Alliance INDIA: इंडिया गठबंधन अब ज्यादा एकजुट होगा; ऐसे तमाम दावे विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा किया जाता रहा है। लेकिन सच किसी से छिपा नहीं है कि तमाम विपक्षी पार्टियां एक दूसरे की टांग खींचने में जुटी रहती है। एक तरफ एकता की बातें होती हैं, तो दूसरी तरफ आपस में ही सिरफुटव्वल होती रहती है। हाल ही में हुए दिल्ली और हरियाणा विधानसभा चुनाव इस बात का गवाह हैं कि कैसे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने आपसी विवाद के चलते गठबंधन को ताख पर रख दिया। चुनाव के नतीजे इस बात को बयां कर रहे हैं कि हरियाणा में कांग्रेस के हार की वजह आप बनी और दिल्ली में आप के हार की वजह कांग्रेस बनी। ऐसे में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात पर संजय राउत बोल रहे हैं कि इंडिया गठबंधन अब ज्यादा एकजुट होगा। नीचे पढ़िए कि आखिर राउत ने क्या कुछ कहा।

आदित्य ठाकरे, संजय राउत ने केजरीवाल से की मुलाकात

शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने रविवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात पर बयान दिया। संजय राउत ने कहा कि हम आदित्य ठाकरे के साथ अरविंद केजरीवाल से मिलने गए थे। यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। चुनाव जीतने के बाद सभी विजेताओं से मुलाकात होती है, लेकिन एक संघर्षशील नेता हार के बाद दुखी हो तो उससे मिलकर संवेदना प्रकट करना हमारा कर्तव्य था। बातचीत के दौरान उनकी उदासी साफ झलक रही थी। केजरीवाल का कहना है कि कांग्रेस दिल्ली और हरियाणा में भाजपा को नहीं, हमें (आप को) हराना चाहती थी।

हरियाणा और दिल्ली को लेकर क्या बोले संजय राउत

उन्होंने कहा कि हम हरियाणा और दिल्ली में आप के साथ गठबंधन करना चाहते थे, हमने बातचीत भी शुरू की थी। हरियाणा की चर्चा के दौरान केजरीवाल जेल में थे, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। राउत ने कहा कि इंडिया गठबंधन अब ज्यादा एकजुट होगा, क्योंकि सभी ने सबक सीख लिया है। हमने केजरीवाल से कहा कि यदि आप कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ते, तो हरियाणा और दिल्ली में नतीजे अलग होते।

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी चाहते थे कि आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई। इसका परिणाम यह हुआ कि दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं और नुकसान हुआ। केजरीवाल ने खुद यह बात मानी। महाराष्ट्र में भी हम इसी स्थिति से गुजरे हैं। चुनाव परिणाम सामने आ चुके हैं। हमने भी यही सब झेला है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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