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लालू यादव और सम्राट चौधरी के बीच छिड़ी जुबानी जंग, राजद सुप्रीमो के बयान का बिहार के डिप्टी सीएम ने ऐसे दिया जवाब

Bihar Politics: बिहार की सियासत में एक बार फिर उठापटक का दौर शुरू हो गया है। लालू प्रसाद यादव के बयान पर सूबे के डिप्टी सीएम और भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि 'उनके (लालू यादव) अत्याचार से ही राजनीति में आया हूं।' आपको बताते हैं कि आखिर लालू के किस बयान के बाद घमासान छिड़ गया है।

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लालू यादव पर सम्राट चौधरी ने साधा निशाना।

Samrat Choudhary vs Lalu Prasad Yadav: लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि धरती पर अत्याचार बढ़ गया है और इसे खत्म करना होगा। उनके इस बयान पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को प्रतिक्रिया दी। सम्राट चौधरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान लालू यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि बिहार पुलिस की एसटीएफ रोज कार्रवाई कर रही है। क्योंकि अपराधी को संरक्षण देने वाले लोग, अपराध की बात करते हैं, किस मुंह से कर रहे हैं?

'लालू प्रसाद यादव का मतलब ही गुंडागर्दी, अपराधीकरण'

डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि 'लालू प्रसाद यादव का मतलब ही गुंडागर्दी, अपराधीकरण और दूसरे का क्रेडिट लेना है। उनका परिवार कभी यह नहीं कहता है कि हमने 15 वर्षों में क्या किया? यह कहता है कि नीतीश कुमार ने 15 साल में क्या किया? इसलिए जिन लोगों ने कभी बिहार के लिए काम ही नहीं किया हो, उस पर क्या बात करनी?'

'लालू प्रसाद यादव के अत्याचार से ही मैं राजनीति में आया हूं'

पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कहां गलतफहमी में हैं? 1995 में लालू प्रसाद यादव के अत्याचार से ही मैं राजनीति में आया हूं। उनके खिलाफ राजनीति में आया हूं। उनके खिलाफ भी जीत कर आया हूं। लालू प्रसाद के खिलाफ ही मेरा परिवार संघर्ष करके आया है। लालू प्रसाद यादव को दिन याद दिलाना चाहता हूं कि उनके साथ जब हमारा परिवार था, तब उनको सत्ता में बचाने का काम किया गया। लालू जी कहां है? वह तो बिहार में भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते थे। हजारों लाठियां खाई हैं इसी शरीर पर।

हमारे परिवार के 22 लोग निर्दोष होकर जेल में थे- चौधरी

पुलिस के द्वारा लालू प्रसाद के गुंडों ने हज़ारों लाठी चलाईं। मेरे घर तोड़ दिए। हमारे परिवार के 22 लोग निर्दोष होकर जेल में थे। हम लोगों ने ह्यूमन राइट से केस जीते। इसलिए लालू प्रसाद यादव को यह आदत है अपने परिवार के लोगों को राजनीति में लाने की। यह दूसरे को लाने की औकात नहीं रखते हैं।

बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को पटना के विद्यापति भवन में गोवर्धन पूजा के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचार को खत्म करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था। अभी धरती पर अत्याचार काफी बढ़ गया है उसको खत्म करना होगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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