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प्रेम के नाम पर वासना का व्यापार: पहचान छिपाकर प्यार करना फ्रॉड...,लव जिहाद पर बोले RSS नेता इंद्रेश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 12, 2023, 08:36 AM IST

RSS: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने कहा, प्यार के नाम पर आज हत्याएं और धर्मांतरण हो रहा है। लोगों ने इसे लव जिहाद बताया है। हम प्यार के नाम पर धोखाधड़ी और हिंसा की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा, हिंदुस्तान प्रेम की धरती है और रहेगी।

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आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार

Photo : ANI

RSS: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने लव जिहाद के मुद्दे पर खुलकर अपने विचार रखे। भोपाल में मीडिया से मुखातिब होते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि प्रेम एक सुपर सोच है। आज के समय में प्यार को धूमिल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, प्यार के नाम पर आज हत्याएं और धर्मांतरण हो रहा है। लोगों ने इसे लव जिहाद बताया है। हम प्यार के नाम पर धोखाधड़ी और हिंसा की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा, हिंदुस्तान प्रेम की धरती है और रहेगी, लेकिन प्यार के नाम पर वासना का व्यापार चल रहा है।

प्रेस में खड़े होते हैं चार प्रश्न

इंद्रश कुमार ने कहा, प्रेम एक सुपर सोच है। इसमें चार प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा, पहला प्रश्न तो यह है कि लड़का और लड़की रात दो बजे तक बात करते हैं और कहते हैं कि एक-दूसरे के बिना जी नहीं सकते। बीच में एक घटना घटती है और पता लगता है कि लड़की का कत्ल हो जाता है। सच में यह प्यार है या फिर वासना। उन्होंने कहा, इस बारे में देश को सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा, दूसरा प्रश्न है कि लड़का और लड़की में प्यार होता है, चाहें वह किस भी मजहब और जाति के क्यों न हों। बाद में प्रेम होने के बाद राज खुलता है तो पता चलता है कि लड़के की असली पहचान दूसरी है। इस तरह धोखे में रखकर प्रेम करना फ्रॉड है और वासना है।

पहचान पता चलने के बाद होता है धर्मांतरण

इंद्रेश कुमार ने कहा, जब लड़का-लड़की को एक दूसरे का वास्तवित मजहब पता चलता है तो लड़की से कहा जाता है कि अपनी पहचान बदलो। जबकि हमने लोकतंत्र में तय किया है कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना। उन्होंने कहा, पहचान छिपाना, पहचान बदलवाना प्रेम है या मक्कारी। लव के नाम पर वासना का व्यापार चल रहा है। प्रेम को धूमिल किया जा रहा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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