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नगीना सांसद चंद्रशेखर को बड़ी राहत, महिला डॉक्टर की याचिका खारिज; कोर्ट ने कहा- स्वीकार योग्य नहीं है अर्जी

नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर को शनिवार को बड़ी राहत मिली। दिल्ली की एक अदालत ने महिला डॉक्टर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को नेता के खिलाफ कथित यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

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नगीना सांसद चंद्रशेखर (फोटो साभार: ANI)

Photo : ANI

नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर को शनिवार को बड़ी राहत मिली। दिल्ली की एक अदालत ने महिला डॉक्टर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को नेता के खिलाफ कथित यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने डॉक्टर रोहिणी घवारी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट थाने के एसएचओ को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने बीएनएसएस की धारा 173(4) का पालन नहीं किया, जो अनिवार्य है। इसलिए यह अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।

स्विट्जरलैंड की डॉक्टर घवारी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उन पर कई गंभीर अपराध किए। इनमें शादी का झूठा वादा करके बार-बार यौन उत्पीड़न, धमकी देना, छिपकर तस्वीरें लेना, पीछा करना, धोखा देना, तकनीक का गलत इस्तेमाल और जान-इज्जत को खतरा शामिल है।

'पुलिस ने दर्ज नहीं की FIR'

डॉक्टर का कहना है कि अक्टूबर 2021 में भारत आने पर आरोपी उन्हें दिल्ली के पुलमन होटल ले गया। वहां उनकी मर्जी और सहमति के खिलाफ बलात्कार किया और शादी का झूठा वादा करके कई घंटों तक होटल में बंद रखा। उसने आरोप लगाया कि उसने नई दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और उसकी शिकायत पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में ट्रांसफर कर दी।

डॉक्टर घवारी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस अधिकारियों की ओर से कार्रवाई न करना उनकी ड्यूटी में लापरवाही के बराबर है। कोर्ट ने उसकी अपील खारिज करते हुए कहा कि सेक्शन 175(3) बीएनएसएस के तहत एप्लीकेशन और उसके साथ लगे एफिडेविट को देखने से पता चलता है कि शिकायतकर्ता ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि संबंधित एसएचओ के कार्रवाई न करने के बाद वह अपनी शिकायत लेकर डीसीपी के पास गई थी।

कोर्ट ने क्या कुछ कहा?

एसीजेएम नेहा मित्तल ने कहा कि धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत आवेदन दाखिल करने के लिए यह जरूरी है कि शिकायतकर्ता शपथ पर न सिर्फ मामले के तथ्य बताए, बल्कि यह भी स्पष्ट करे कि उसने पुलिस से धारा 154(1) और 154(3) सीआरपीसी (या बीएनएसएस की धारा 173(4)) के तहत संपर्क किया था।

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को शपथ पर मामले के तथ्य बताने के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि उसने पुलिस अधिकारियों से धारा 154(1), 154(3) सीआरपीसी या 173(4) बीएनएसएस के तहत मदद मांगी थी।

कोर्ट ने आगे कहा कि इस आवेदन में धारा 154(3) सीआरपीसी या 173(4) बीएनएसएस का पालन करने का कोई जिक्र नहीं है। न तो धारा 173(4) बीएनएसएस का पालन बताया गया है और न ही 3 सितंबर 2025 (शपथ की तारीख) से पहले संबंधित डीसीपी को कोई शिकायत भेजी गई थी।नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर को शनिवार को बड़ी राहत मिली। दिल्ली की एक अदालत ने महिला डॉक्टर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को नेता के खिलाफ कथित यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने डॉक्टर रोहिणी घवारी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट थाने के एसएचओ को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने बीएनएसएस की धारा 173(4) का पालन नहीं किया, जो अनिवार्य है। इसलिए यह अर्जी स्वीकार योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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