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'जो ममता के साथ हुआ वही...' नीति आयोग की बैठक में नीतीश के न शामिल होने पर RJD का तंज, कहा- 'उन्हें पहले से पता था'

Niti Aayog Meeting: नीतीश कुमार के नीति आयोग की बैठक में न शामिल होने पर राजद ने कहा, ममता दीदी के साथ जो व्यवहार नीति आयोग की बैठक में हुआ उसका आभास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पहले से था। इसलिए वह बैठक में शामिल नहीं हुए।

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नीतीश कुमार।

Photo : BCCL

Niti Aayog Meeting: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को दिल्ली में नीति आयोग की बैठक बीच में छोड़कर निकल गई थीं। उन्होंने केंद्र सरकार पर उनका माइक बंद करने और कम समय दिए जाने का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रविवार को बंगाल सीएम का समर्थन किया है। साथ ही नीतीश कुमार के इस बैठक में न शामिल होने पर भी तंज कसा है।

राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, ममता दीदी के साथ जो व्यवहार नीति आयोग की बैठक में हुआ उसका आभास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पहले से था। इसलिए वह बैठक में शामिल नहीं हुए। यह बैठक सिर्फ भाजपा की नीति बनाने के लिए आयोजित की गई। अगर देश की नीति बनाई जाती तो सब की अहमियत को समझा जाता। बैठक में तो विपक्ष को बोलने ही नहीं दिया जा रहा है। जब विपक्ष को सुनने वाला कोई नहीं है तो फिर नीति आयोग की बैठक का क्या मतलब है?"

'देश का बंटाधार करेंगी इनकी नीतियां'

राजद प्रवक्ता ने कहा, ममता बनर्जी ने बैठक बीच में छोड़कर यह दिखा दिया कि लोकतंत्र में विपक्ष की अहमियत को कम नहीं समझा जाए। लोकतंत्र और संविधान में विपक्ष भी सरकार का अंग है। अगर ऐसी ही नीति वे लोग बनाते रहे तो देश का बंटाधार कर देंगे। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में शनिवार को नीति आयोग के संचालन परिषद की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक में शामिल तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पहुंची थीं, लेकिन वह बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल आई थीं। उन्होंने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया था।

'सिर्फ 5 मिनट बोलने दिया गया'

ममता बनर्जी ने कहा, केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। मैं बोलना चाहती थी, लेकिन मुझे सिर्फ पांच मिनट बोलने दिया गया। मुझसे पहले के लोगों ने 10-20 मिनट तक बात की। यह अपमानजनक है। यह सिर्फ बंगाल का ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रीय दलों का अपमान है। बंगाल सीएम ने नीति आयोग को खत्म करके योजना आयोग को फिर से बहाल करने की भी मांग की है। दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारों ने नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया था। इन राज्यों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने बजट में उनके साथ भेदभाव किया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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