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राजद 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी', जिसके सीएमडी लालू यादव और तेजस्वी एमडी हैं; गिरिराज सिंह का तंज

Giriraj Singh Slams Lalu Family: गिरिराज सिंह ने लालू परिवार पर तीखा तंज कसते हुए ये कहा है कि राजद 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' है। जिसके सीएमडी लालू यादव हैं और तेजस्वी यादव एमडी हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि भारत के सनातनी अब एक हों।

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गिरिराज सिंह

Photo : PTI

Bihar Politics: भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को विरोधियों पर खासकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू यादव पर परिवारवाद को लेकर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दरअसल, राजद कोई पार्टी नहीं है। यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसके सीएमडी लालू यादव हैं और उन्होंने तेजस्वी यादव को एमडी नियुक्त किया है। केंद्रीय मंत्री ने तंज कसते हुए कहा बिहार में किसी यादव के पास योग्यता नहीं है, केवल लालू यादव के परिवार में ही योग्यता है, इसलिए ही उन्होंने तेजस्वी यादव को नियुक्त किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, यह परिवारवाद की पराकाष्ठा है।

'मुसलमानों का वोट पाने के लिए ऐसा करते हैं ठेकेदार'

कुंभ मेला से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा ,"यह देश का दुर्भाग्य है कि कुछ वोट के ठेकेदार मुसलमानों का वोट पाने के लिए, चाहे अखिलेश यादव की पार्टी हो, राहुल गांधी या लालू यादव की पार्टी हो, कुंभ के माध्यम से मुसलमानों को खुश करना चाहती हैं, मुसलमानों का वोट बटोरना चाहती हैं। ऐसे ही लोगों के कारण देश पहले ही भुगत चुका है। नादिरशाह का इतिहास लोगों को मालूम है कि वह भारत कैसे आया था। लेकिन, सनातनियों की संस्कृति इतनी मजबूत है कि जितने इस पर हमले होंगे उतना ही यह मजबूत होगा। जितना जिनको गाली देना है, गाली दें।"

'अब समय आ गया है कि भारत के सनातनी अब एक हों'

उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि भारत के सनातनी अब एक हों। नहीं तो ये वोट के सौदागर चैन से नहीं रहने देंगे। बंटोगे तो कटोगे।

आम आदमी पार्टी से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा, "आप में सारे भ्रष्टाचारियों की जमात खड़ी है। अरविंद केजरीवाल अपनी पत्नी को प्रोजेक्ट करना चाहते हैं और बिहारी को, पूर्वांचल को गाली दे रहे हैं, इस बार पता चल जाएगा। बांग्लादेशी और रोहिंग्या को यह वोट बैंक बनाकर जीतना चाहते हैं। भारतीय जनता पार्टी ने रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के खिलाफ जिस काम को सत्ता में आने के बाद शुरू किया है, उसे पूरा करेगी।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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