Parliament of India: 28 मई देश के संसदीय इतिहास में ऐतिहासिक दिन के तौर पर दर्ज हो चुका है। पूरे विधि विधान के साथ पीएम नरेंद्र मोदी ने देश की नई संसद का उद्घाटन किया। जहां इसके समर्थन में आवाज उठी तो उसके विरोध में भी सुर सुनाई पड़े। लेकिन राष्ट्रीय जनता दल ने संसद के नए भवन की समानता ताबूत से की और कैप्शन में लिखा कि ये क्या है। आरजेडी के नेका शक्ति यादव ने कहा कि लोकतंत्र का ताबूतीकरण किया जा रहा है। संविधान के अनुच्छेद 79 में स्पष्ट है कि राष्ट्रपति संसदीय व्यवस्था के उच्चतम बिंदु पर हैं लेकिन उन्हें ना बुलाकर अपमान किया गया है।
आरजेडी का ट्वीट

RJD Tweet on Parliament
और लोगों ने क्या कहा
उद्घाटन समारोह के दौरान आयोजित बहु-विश्वास प्रार्थना सभा में शामिल जैन पुजारी आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा, 'आज नई संसद में जब 'धर्म दंड' स्थापित किया गया तो हमने एक ऐतिहासिक क्षण देखा।सिख गुरु बलबीर सिंह ने कहा, "यह बहुत अच्छी बात है कि नई संसद का निर्माण किया गया है। मैं खुद को राजनीति से दूर रखता हूं, मैं केवल इतना कह सकता हूं कि देश के विकास के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना चाहिए।" नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर बहु-विश्वास प्रार्थना में
