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Kolkata Rape Case: आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर गिरी एक और गाज, मेडिकल काउंसिल ने रद्द किया रजिस्ट्रेशन

Kolkata Rape Case: कोलकाता रेप और मर्डर केस में अब पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने कार्रवाई की है। मेडिकल काउंसिल ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का मेडिकल रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है।

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डॉ. संदीप घोष का मेडिकल रजिस्ट्रेन रद्द।

Photo : PTI

RG Kar Case: कोलकाता रेप और मर्डर केस में अब पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने कार्रवाई की है। मेडिकल काउंसिल ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का मेडिकल रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। डब्ल्यूबीएमसी द्वारा तैयार की जाने वाली पंजीकृत चिकित्सकों की सूची से घोष का नाम 19 सितंबर को हटा दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि घोष का लाइसेंस बंगाल चिकित्सा अधिनियम 1914 के विभिन्न प्रावधानों के तहत रद्द किया गया है। इससे पहले आईएमए ने भी डॉ. संदीप घोष की सदस्यता रद्द कर दी थी।

बता दें, संदीप घोष कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में सीबीआई की हिरासत में हैं। वह कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी के अलावा आरजी कर कॉलेज में वित्तीय अनियमितता को लेकर भी कटघरे में हैं। सीबीआई ने इस मामले में अस्पताल के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष और उनके तीन कथित सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इससे पहले संदीप घोष के ठिकानों पर छापेमारी के बाद ईडी ने दावा किया है कि उनकी पत्नी ने पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों से 'उचित मंजूरी' मिले बिना दो अचल संपत्तियां खरीदीं थी।

टीएमसी विधायक से ईडी ने की पूछताछ

तृणमूल कांग्रेस के विधायक सुदीप्त रॉय इस मामले में पूछताछ के लिए गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। रॉय पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष हैं और आरजी कर रोगी कल्याण समिति का प्रभार भी संभालते हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में उनसे पूछताछ की है क्योंकि वह भी इस मामले में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक दोपहर करीब एक बजे साल्ट लेक स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्यालय पहुंचे।

ईडी ने की थी छापेमारी

ईडी ने मंगलवार को हुगली जिले के श्रीरामपुर से विधायक रॉय के परिसरों के अलावा कुछ अन्य के परिसरों की भी तलाशी ली थी। रॉय को मामले में पूछताछ के लिए कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय में बृहस्पतिवार को उपस्थित होने के लिए कहा गया था। सूत्रों ने बताया कि रॉय से पूछताछ करने के अलावा जब्त किए गए कुछ फोन भी उनकी मौजूदगी में खोले जाएंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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