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Republic Day 2024 Parade: गणतंत्र दिवस परेड देखने जाने का है प्लान? पहले जान लीजिए किन-किन चीजों पर है बैन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 18, 2024, 09:43 PM IST

Republic Day 2024 Parade:परेड में शामिल होने वाले अगंतुकों को अनिवार्य रूव से वैध आईडी कार्ड रखना होगा, जिससे आपकी पहचान की जा सके। इसके साथ ही आपको सुरक्षा जांच में भी पूरा सहयोग करना होगा।

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गणतंत्र दिवस परेड

Photo : BCCL

Republic Day 2024 Parade: देश 26 जनवरी को अपना 75वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इस खास दिन के लिए तैयारी जोरों पर है। गणतंत्र दिवस पर हर साल परेड का आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने की ख्वाहिश हर किसी की होती है। इसके लिए सरकार लोग ऑनलाइन व ऑफलाइन टिकट भी खरीद सकते हैं। वहीं भारत सरकार द्वारा भी परेड के लिए वीआईपी लोगों को निमंत्रण भेजा जाता है।

गणतंत्र दिवस की परेड के लिए टिकटों की बिक्री 10 जनवरी से शुरू हो गई थी, जो 25 जनवरी तक चलेगी। हालांकि, आपको इस परेड में शामिल होने से पहले नियमों को जान लेना जरूरी है। दरअसल, परेड में जरूरी सुरक्षा उपायों के तहत कई वस्तुओं की मनाही होती है। आइए जानते हैं गणतंत्र दिवस परेड के दौरान आप क्या-क्या नहीं ले जा सकते हैं।

आईडी कार्ड सबसे जरूरी

दिल्ली पुलिस के नियमों के मुताबिक, परेड में शामिल होने वाले अगंतुकों को अनिवार्य रूव से वैध आईडी कार्ड रखना होगा, जिससे आपकी पहचान की जा सके। इसके साथ ही आपको सुरक्षा जांच में भी पूरा सहयोग करना होगा। साथ ही, टिकट या पास पर क्यूआर कोड का सत्यापन किया जाएगा।

इन चीजों की परेड में अनुमति नहीं

  • आयोजन स्थल पर खाने-पीने का सामान न लाएं।
  • समारोह स्थल पर सिगरेट, बीड़ी और लाइटर लाना प्रतिबंधित है।
  • परेड स्थल पर बैग, ब्रीफकेस और पेन न लाएं।
  • रेडियो, ट्रांजिस्टर, टेप रिकॉर्डर जैसी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं सख्त वर्जित हैं।
  • कैमरा, दूरबीन और हैंडीकैम जैसी चीजें भी प्रतिबंधित हैं।
  • समारोह में आने वाले लोगों को डिजिटल डायरी, पाम-टॉप कंप्यूटर, आई पैड आदि जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं लाने चाहिए।
  • खंजर, तलवार, स्क्रू ड्राइवर, काटने, तेज, नुकीली या धारदार सामग्री जैसी वस्तुएं सख्त वर्जित हैं।
  • रिमोट से नियंत्रित कार की चाबियां और ज्वलनशील वस्तुएं भी प्रतिबंधित हैं।
  • हथियार और गोला-बारूद, आतिशबाजी, पटाखे आदि भी प्रतिबंधित हैं।
  • आयोजन स्थल पर शराब, परफ्यूम, स्प्रे, छाता, खिलौना बंदूक आदि वस्तुएं न लाएं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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