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अमृतसर में बाबा साहेब की प्रतिमा तोड़ने पर भड़के मोदी के मंत्री, पंजाब सरकार को सुनाई खरी-खोटी

Punjab News: डॉ. बीआर अंबेडकर की मूर्ति तोड़ने पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, "बाबासाहेब अंबेडकर ने दलितों की भलाई के लिए काम किया। उनकी मूर्ति तोड़ी गई लेकिन उनकी विचारधारा मजबूत है। मामले की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि यह किसकी योजना थी। मैं सीएम से बात करने जा रहा हूं कि आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।"

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रामदास अठावले ने पंजाब सरकार पर साधा निशाना।

Ramdas Athawale Slams Punjab Sarkar: केंद्रीय मंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास आठवले बुधवार को पंजाब के अमृतसर पहुंचे। यहां उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने की निंदा की और राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए आप सरकार पर निशाना साधा।

भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने की कड़ी निंदा

केंद्रीय मंत्री घटनास्थल पर पहुंचकर मामले का जायजा लेंगे और पुलिस कमिश्नर तथा बड़े अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। गुरु रामदास अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका जोरदार स्वागत हुआ। यहां पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने की कड़ी निंदा की।

आठवले ने कहा, "देश में भीमराव अंबेडकर की बहुत बड़ी देन है। एक शरारती तत्व ने बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश की है, लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा ऐसे नहीं टूटेगी, उनके विचार बहुत ज्यादा मजबूत हैं।"

'पकड़े गए शरारती तत्व को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए'

जांच की अपील करते हुए उन्होंने कहा, "इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए कि इस घटना के पीछे कौन लोग हैं। वहीं, पकड़े गए शरारती तत्व को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"

भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से खराब है। पंजाब एक खुशहाल प्रदेश है। यहां पर बहुत सारे किसान खेती करते हैं, लेकिन प्रदेश की कानून व्यवस्था को ठीक करने के लिए मुख्यमंत्री काम नहीं कर पा रहे हैं। भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ हुई घटना को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हो रहा है। इस मामले की जल्द से जल्द जांच होनी चाहिए और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है, यह सामने आना चाहिए।"

उल्लेखनीय है कि अमृतसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश की विपक्षी पार्टियां इस विषय पर 'आप' सरकार पर निशाना साध रही हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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