Ram Mandir Donation: अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे की रकम का एक बड़ा हिस्सा गायब होने का दावा किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चढ़ावे की रकम में हेरफेर का आरोप लगाते हुए एक दिन पहले सवाल पूछा था। जिस पर अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दानपात्र की धनराशि में गड़बड़ी के मामले पर बयान जारी करते हुए कहा कि ऐसे कोई घटना सामने नहीं आई है। ट्रस्ट ने अखिलेश यादव के दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि मंदिर से जुड़े सभी लेनदेन और दान का पूरा हिसाब बेहद बारीकी और पारदर्शी तरीके से रखा जाता है।
ट्रस्ट ने क्या कहा?
महासचिव चंपतराय कहा है, ‘श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक आडिट होता है। इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं। आडिट कार्य कई दिन तक चलता है। वही कार्य आजकल हो रहा है। अभी तक कोई ऐसी बात सामने नहीं आई है।’
सपा का पलटवार
इस पर अयोध्या सपा के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोपों को और विस्तार दिया। उन्होंने दावा किया कि चोरी की रकम करोड़ों रुपये तक हो सकती है। पांडे ने कहा कि अगर चोरी नहीं हुई है तो ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय सामने आएं और प्रभु श्रीराम की कसम खाकर कहें कि सब कुछ झूठ है। अगर बात सच है तो एफआईआर करवाएं। अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये चोरी कितने समय से हो रही थी। ट्रस्ट के किन-किन सदस्यों तक ये पैसा गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
कैसे होती है चढ़ावे की रकम की गिनती?
दरअसल, राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में ट्रस्ट के लोगों के साथ होती है। पूरा काम सीसीटीवी निगरानी में होता है। रकम को रजिस्टर में दर्ज कर मंदिर परिसर के लॉकर में रखा जाता है और अगले दिन भारतीय स्टेट बैंक अयोध्या धाम ब्रांच के मुख्य खाते में जमा कर दिया जाता है। चढ़ावे की राशि का ऑडिट टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की निगरानी में किया जाता है और इसकी जानकारी ट्रस्ट की बैठक में दी जाती है। आखिरी बार दिसंबर 2025 में चढ़ावे की जानकारी बैठक में साझा की गई थी।
