मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा दिया गया प्रस्ताव संबंधी नोटिस खारिज कर दिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को ये कदम उठाया। इसकी जानकारी लोकसभा सचिवालय ने आधिकारिक बयान में दी।
विपक्ष ने दिया था 12 मार्च को नोटिस
बता दें कि लोकसभा में विपक्षी दलों के 130 सदस्यों और राज्यसभा में 63 सांसदों ने 12 मार्च को यह नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा था। इस नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5), मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) तथा न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 का हवाला देते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी।
लोकसभा अध्यक्ष का फैसला
इस प्रस्ताव को खारिज किए जाने के संबंध में लोकसभा सचिवालय ने बयान में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि नोटिस में उठाए गए सभी प्रासंगिक पहलुओं और तथ्यों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार किया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि नोटिस में दिए गए तथ्य महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए हैं।
राज्यसभा में भी नोटिस खारिज
इसी बीच, राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी ने बताया कि उच्च सदन के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी विपक्षी सांसदों द्वारा जमा किए गए इसी प्रकार के नोटिस को अस्वीकार कर दिया है।उनके अनुसार नोटिस में हटाने की कार्रवाई के लिए आवश्यक आधार पूरा नहीं होता।
बता विपक्षी दलों ने कई मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त पर सत्तारूढ़ भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया है, खासकर मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के संबंध में। इन्हीं आरोपों के चलते विपक्षी सांसदों ने ये प्रस्ताव दिया था।
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है, जिसका अर्थ है कि महाभियोग केवल "सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता" के आधार पर ही किया जा सकता है।
