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अगले दो से तीन विधानसभा चुनाव में जीतेगी कांग्रेस, राहुल गांधी ने बताई BJP की हार की बड़ी वजह

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 2, 2023, 05:20 PM IST

Rahul Gandhi: राहुल गांधी ने कहा, इस बात को कृपया मानिए कि भारत के 60 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट नहीं देते, नरेन्द्र मोदी के लिए वोट नहीं देते। आपको यह याद रखना है। भाजपा के हाथ में शोर मचाने के साधन हैं, इसलिए वे चिल्ला सकते हैं। वे चीजों को तोड़-मरोड़ सकते हैं और वे यह काम बेहद अच्छे तरीके से करते हैं।

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राहुल गांधी

Photo : Twitter

Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि उनकी पार्टी अगले तीन-चार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सफाया कर देगी।उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास सत्तारूढ़ पार्टी को हराने के लिए आवश्यक मूलभूत चीजें हैं और भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा भाजपा का समर्थन नहीं करता।

अमेरिका के तीन शहरों की अपनी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को जाने माने भारतीय-अमेरिकी फ्रैंक इस्लाम द्वारा उनके लिए आयोजित स्वागत कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, लोगों को ऐसा लगता है कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और भाजपा की ताकत को रोका नहीं जा सकता, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं यहां एक छोटी सी भविष्यवाणी करता हूं कि अगले तीन से चार चुनाव, जो हम भाजपा के खिलाफ सीधे लड़ेंगे उनमें उसका सफाया होगा।

भाजपा के साथ वही करेंगे, जो कर्नाटक में किया

उन्होंने कहा, मैं अभी आपको बता सकता हूं कि विधानसभा चुनाव में उनके लिए वास्तव में कठिन समय आने वाला है। हम उनके साथ वही करेंगे जो हमने कर्नाटक में किया है, लेकिन अगर आप भारतीय मीडिया से पूछेंगे तो वे कहेंगे कि ऐसा नहीं होगा। बता दें, कर्नाटक में 10 मई को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया था। राहुल गांधी ने भारतीय-अमेरिकियों के आमंत्रित समूह, थिंक-टैंक समुदाय के सदस्यों और सांसदों से कहा कि भारतीय प्रेस वर्तमान में वह दिखा रहा है जो पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में है।

60 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट नहीं देते

राहुल गांधी ने कहा, इस बात को कृपया मानिए कि भारत के 60 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट नहीं देते, नरेन्द्र मोदी के लिए वोट नहीं देते। आपको यह याद रखना है। भाजपा के हाथ में शोर मचाने के साधन हैं, इसलिए वे चिल्ला सकते हैं। वे चीजों को तोड़-मरोड़ सकते हैं और वे यह काम बेहद अच्छे तरीके से करते हैं। हालांकि उनके पास भारतीय आबादी का विशाल बहुमत नहीं है। नेशनल प्रेस क्लब (एनपीसी) में बृहस्पतिवार को मीडिया के साथ बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि देश में गुप्त तरीके से ऐसा माहौल बन रहा है जो अगले आम चुनावों में लोगों को हैरत में डाल देगा। उन्होंने कहा, इस साल के अंत में पांच राज्यों-मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होंगे, जो 2024 में होने वाले महत्वपूर्ण आम चुनाव के लिए आधार तैयार करेंगे।

विपक्ष को एक करना एक जटिल चर्चा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, लोकतांत्रिक ढांचे का पुनर्निर्माण आसान नहीं होगा। यह मुश्किल होगा। इसमें समय लगने वाला है, लेकिन हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि भाजपा को हराने के लिए हमारे पास बुनियादी चीजें हैं। एनपीसी में एक अन्य प्रश्न के उत्तर में राहुल ने कहा कि भारत में विपक्ष अच्छी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह और भी एकजुट होता जा रहा है। हम सभी विपक्षी दलों के साथ बातचीत कर रहे हैं। मेरा मानना है कि काफी काम हो रहा है। उन्होंने कहा, यह बड़ी जटिल चर्चा है क्योंकि कुछ जगहों पर हमारी (अन्य) विपक्षी दलों के साथ प्रतिस्पर्धा है। इसलिए आवश्यकतानुसार यह थोड़ा लेने और थोड़ा देने की बात है। लेकिन मुझे विश्वास है कि ऐसा होगा।

मुस्लिम लीग धर्मनिरपेक्ष पार्टी

राहुल ने केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ कांग्रेस के गठबंधन का बचाव करते हुए कहा कि मुस्लिम लीग पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, उसमें कुछ भी धर्मनिरपेक्षता विरोधी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दुनियाभर में लोकप्रियता के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा, निश्चित रूप से देश के संस्थानों पर कब्जा है। निश्चित रूप से देश की प्रेस पर कब्जा है। मैं इस बात को नहीं मानता। मैं जो भी सुनता हूं, हर बात को नहीं मानता। कांग्रेस यदि सत्ता में आई तो भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए क्या करेगी, इस पर राहुल गांधी ने कहा, भारत में पहले ही बहुत मजबूत प्रणाली रही है, लेकिन इस प्रणाली को कमजोर कर दिया गया है। ऐसे स्वतंत्र संस्थान चाहिए होंगे जिन पर दबाव और नियंत्रण नहीं हो। भारत में यही प्रतिमान रहा है। देश में कुछ भ्रम की स्थिति है। अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो इन्हें तेजी से दुरुस्त किया जा सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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