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बंगला नंबर-5, सुनहरी बाग रोड... ये होगा राहुल गांधी का नया बंगला

Rahul Gandhi New Bungalow: केंद्रीय आवास समिति ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुनहरी बाग रोड, बंगला नंबर-5 की पेशकश की है। राहुल गांधी की तरफ से सहमति मिलने के बाद यह उनका नया बंगला होगा। पहले राहुल गांधी 12 तुगलग लेन में रह रहे थे। हालांकि, पिछले साल सदस्यता जाने के बाद उन्होंने यह बंगला खाली कर दिया था।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी।

Photo : Twitter

Rahul Gandhi New Bungalow: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का पता बदलने जा रहा है। अब उनका नया पता सुनहरी बाग रोड, बंगला नंबर-5 होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय आवास समिति ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इस बंगले में रहने का प्रस्ताव दिया है। कांग्रेस नेता की तरह से सहमति मिलते ही यह बंगला उन्हें आवंटित कर दिया जाएगा।

आवास समिति के साथ-साथ राहुल गांधी से जुड़े सत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है। वहीं, राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी भी सुनहरी बाग रोड स्थिति बंगले का मुआयना करने पहुंचीं। इसका वीडियो भी सामने आया है।

राहुल गांधी को मिलेगा टाइप 8 बंगला

राहुल गांधी को सुनहरी बाग रोड स्थिति जिस बंगले की पेशकश की गई है, यह टाइप 8 श्रेणी का बंगला है। आमतौर इस तरह का बंगाल कैबिनेट मंत्रियों को आवंटित किया जाता है। राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष होने के नाते टाइप 8 बंगले की पेशकश की गई है।

पहले यह था राहुल गांधी का पता

राहुल गांधी कई वर्षों तक 12 तुगलग लेन में रहे, लेकिन पिछले साल मानहानि के मामले में गुजरात की एक निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद जब उनकी सदस्यता चली गई तो उन्होंने इस आवास खाली कर दिया था। इसके बाद से वह अपनी मां और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर रह रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस बार रायबरेली से निर्वाचित हुए हैं और नेता प्रतिपक्ष का उत्तरदायित्व निभा रहे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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