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'मेरा तो घर ही नहीं है, सरकार ने ले लिया...' राहुल गांधी को लगा इन महिलाओं का आशीर्वाद

Rahul Gandhi Will Get Back His Home: सांसदी जाने के बाद जिस वक्त राहुल गांधी अपने सरकारी बंगले को खाली कर रहे थे, उस वक्त उनके चेहरे पर मायूसी थीष अधिकारी को चाभी देते वक्त राहुल की तकलीफ झलक रही थी। अब राहुल गांधी को उनका बंगला वापस मिलने वाला है और किसान महिलाओं की दुआ उन्हें लग गई है।

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राहुल गांधी को वापस मिलेगा उनका घर।

Photo : ANI

Rahul Gandhi News: राहुल गांधी जब रोहतक में किसानों से मिलने पहुंचे थे, तब महिलाओं ने उनसे कहा था कि 'आप हमारी बात तो कर रहे हैं अपने और अपने परिवार के बारे में तो कुछ बता ही नहीं रहे हैं।' इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा था कि मैं दिल्ली से हूं। किसान महिलाओं ने तुरंत बोला, फिर हमें भी एक बार दिल्ली घुमा दो और अपना घर दिखा दो। इसके बाद राहुल गांधी से अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि मेरा तो घर ही नहीं है, मेरा सरकार ने घर ले लिया। इसके बाद राहुल ने अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को फोन मिलाया। उन्होंने फोन पर प्रियंका से कहा कि यहां मेरे साथ कुछ महिलाएं हैं। वो आपके घर खाना खाना चाहती हैं। यहां 20 महिलाएं हैं सभी आपके घर आकर खाना खाना चाहती हैं। मैंने कह दिया कि आ रहे हैं। इस पर प्रियंका ने तुरंत बोला कि मैं जरूर खिलाऊंगी। प्रियंका ने महिलाओं से पूछा कि क्या मैं वहीं खाना लेकर आ जाऊं? इस पर महिलाओं ने जवाब दिया कि नहीं हम वहां आकर आपके साथ खाएंगे।

राहुल गांधी के बुलावे पर दिल्ली पहुंची महिलाएं

राहुल गांधी के इस बुलावे पर किसान महिलाएं दिल्ली पहुंचीं। प्रियंका गांधी के घर पर उन्होंने खाना खाया और इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के अलावा उनकी मां सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। इस दौरान किसान महिलाओं ने सोनिया से बात करते हुए ये पूछा था कि राहुल गांधी की शादी कब कर रही हैं? इस सवाल के जवाब में सोनिया ने बड़ा मजेदार जवाब दिया और बोला था कि आप ही दुल्हन ढूंढ दीजिए। राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने अब बड़ी राहत दी है। उनकी सजा पर रोक लगा दी गई है और अब जल्द ही उनकी संसद सदस्यता भी वापस बहाल हो सकती है। राहुल गांधी वापस लोकसभा में अपनी आवाज बुलंद करते नजर आएंगे। खास बात ये है कि अब उनको उनका घर वापस मिल जाएगा।

घर खाली करते वक्त इमोशनल हुए थे राहुल गांधी

जब राहुल गांधी की सदस्यता चली गई थी तो उनका घर भी उनसे छिन गया था। नियमानुसार राहुल गांधी ने अपना सरकारी आवास खाली कर दिया था। जिस वक्त राहुल अपना सरकार घर खाली कर रहे थे, उस वक्त वो काफी भावुक दिख रहे थे। अपने घर की चाभी सरकारी अधिकारी को सौंपते वक्त राहुल इमोशनल हो गए थे। अब उनको नियम के तहत सरकारी आवास फिर से आवंटित किया जाएगा। यहां ये देखना अहम होगा कि राहुल को कौन सा बंगला आवंटित होता है।

क्या राहुल गांधी को वही सरकारी घर वापस मिलेगा?

राहुल गांधी की सदस्यता बहाल होने के बाद उनको सरकारी बंगला कब वापस मिलेगा? इस सवाल का जवाब समझने के लिए आपको नियम कानून समझना होगा। सासंदों का सरकार बंगला केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के निदेशालय द्वारा आवंटित किया जाता है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्यों के आवास आवंटन की खातिर एक सदन समिति है। यही समिति बंगला आवंटन के लिए मंत्रालय से सिफारिश करती है, जिसके आवास आवंटित किया जाता है। मगर राहुल गांधी के मामले में गौर करने वाली बात ये होगी कि जरूरी नहीं है कि राहुल गांधी जहां पहले रह रहे थे, वही 12 तुलगक रोड वाला बंगला उन्हें आवंटित किया जाएगा।

राहुल गांधी को लगा किसान महिलाओं का आशीर्वाद

सदस्यता जाने के बाद कई बार राहुल गांधी ने सार्वजनिक जगहों पर अपना दर्द बयां किया था और ये कहा था कि सरकार ने उनसे उनका घर भी छीन लिया। कई बार राहुल ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। मगर जब राहुल किसान महिलाओं के पास पहुंचे और उन्हें दिल्ली आने का आमंत्रण दिया, तब महिलाओं ने राहुल को भर-भरकर आशीर्वाद दिया था। दिल्ली आई महिलाओं ने सोनिया गांधी के साथ डांस भी किया था। अब राहुल गांधी को शुक्रवार को जब बड़ी खुशखबरी मिली है, तो ये कहना गलत नहीं होगा कि उन्हें किसान महिलाओं का आशीर्वाद लग गया है।

आपको बता दें कि गुजरात के सूरत की एक अदालत द्वारा राहुल गांधी को दो साल की सजा दिए जाने के बाद, नियमानुसार लोकसभा सचिवालय ने 24 मार्च 2023 को एक नोटिफिकेशन जारी कर 23 मार्च 2023 से उनकी लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया गया था। राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से सांसद चुने गए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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