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'राजनीति नहीं करूंगा, लेकिन परिवार मुश्किल में हैं...' हाथरस पीड़ितों से मिलने के बाद बोले राहुल गांधी

Rahul Gandhi met Hathras stampede Victims: राहुल गांधी ने हाथरस भगदड़ कांड के पीड़ितों से मिलने के बाद कहा कि मैं इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहता हूं। लेकिन प्रशासन की कमियां तो हैं, गलतियां हुई हैं और उनका पता लगाना चाहिए। उन्होंने कहा, पीड़ित परिवार के लोग गरीब हैं, उन्हें ज्यादा से ज्यादा मुआवजा मिलना चाहिए।

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राहुल गांधी ने हाथरस कांड के पीड़ितों से मुलाकात की।

Photo : Twitter

Rahul Gandhi met Hathras stampede Victims: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज हाथरस भगदड़ कांड के पीड़ितों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ितों का दर्द सुना और उन्हें मदद का आश्वासन भी दिया। राहुल गांधी ने पीड़ितों से मुलाकात के बाद कहा कि यह एक दुखद घटना है। कई लोगों की मौत हो गई है। पीड़ित परिवारों के लिए यह मुश्किल समय है। उन्होंने कहा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़ितों को अधिकतम मुआवजा दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे गरीब परिवार से हैं।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं इस घटना को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहता हूं, लेकिन प्रशासन की ओर से कमियां तो हैं। गलतियां हुई हैं, इसलिए उनका पता लगाना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से अनुरोध करता हूं कि वे दिल खोलकर मुआवजा दें। अगर मुआवजे में देरी होती है, तो इससे किसी को फायदा नहीं होगा। मैंने मृतकों के परिवार के सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से बात की और उन्होंने मुझे बताया कि पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं थी। वे सदमे में हैं और मैं बस उनकी स्थिति जानना चाहता था।

मंजू देवी के घर पहुंचे राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार को सबसे पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के पिलखना गांव पहुंचे। उन्होंंने यहां हाथरस भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। राहुल गांधी सबसे पहले मंजू देवी के घर पहुंचे। उनके पति छोटे लाल और परिवार से मुलाकात की। हाथरस हादसे में मंजू देवी और उनके बेटे की मौत हो गई थी। राहुल ने हादसे के बारे में जानकारी ली। पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मंजू देवी की बेटी ने कहा कि इलाज में जैसी मदद होनी चाहिए वो नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि आप परेशान न हो पूरी मदद की जायेगी। राहुल गांधी पिलखना गांव में ही दो और परिवार शांति देवी और प्रेमवती के घर भी पहुंचे। इसके बाद राहुल गांधी हाथरस के लिए रवाना हो गए। बता दें, हाथरस में दो जुलाई को भगदड़ की घटना में जान गंवाने वाले 121 लोगों में से 17 अलीगढ़ से थे और 19 लोग हाथरस से थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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