देशभर के कई हिस्सों में वक्फ कानून के खिलाफ विरोध हुआ।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ देशभर के कई जगहों में विरोध प्रदर्शन और विरोध रैली देखने को मिली। जुमे के नमाज के बाद कई जगहों पर इसके खिलाफ विरोध हुआ। कोलकाता में छात्रों ने वक्फ अधिनियम के विरोध में रैली निकाली, तो कश्मीर में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ पीडीपी के मार्च को पुलिस ने रोका। महाराष्ट्र के मुंबई और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
शहर स्थित आलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने शुक्रवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में रैली निकाली और कानून को वापस लेने की मांग की। रैली में शामिल लोगों ने पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधकों को पार करने के बाद पार्क सर्कस क्षेत्र में ‘सेवन पॉइंट क्रॉसिंग’ को भी कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया। अलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने परिसर से मार्च निकाला और नारे लगाते हुए मांग की कि कानून वापस लिया जाए।
रैली में शामिल एक छात्र ने कहा, 'भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात कर रही है, लेकिन एक समुदाय के साथ भेदभाव किया जा रहा है।' भाजपा ने कहा है कि वह वक्फ (संशोधन) अधिनियम के लाभों का प्रचार करने और विपक्ष की आलोचना का मुकाबला करने के लिए 20 अप्रैल से विशेष रूप से मुसलमानों को ध्यान में रखकर एक पखवाड़े तक जन जागरूकता अभियान शुरू करेगी।
पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मुस्लिम समुदाय के सदस्य कोलकाता में सड़कों पर उतरे।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के पारित होने के खिलाफ श्रीनगर में शुक्रवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विरोध मार्च को पुलिस ने रोक दिया, पार्टी कार्यालय पर अवरोधक लगा दिए गए और प्रदर्शनकारियों को परिसर के अंदर ही रोक दिया। पार्टी महासचिव खुर्शीद आलम के नेतृत्व में पीडीपी के अनेक कार्यकर्ता इस अधिनियम के पारित होने के विरोध में यहां शेर-ए-कश्मीर पार्क के समीप पार्टी मुख्यालय पर एकत्र हुए। यह अधिनियम पिछले सप्ताह पारित हुआ था। पीडीपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से बाहर निकलकर शहर के केंद्र की ओर मार्च करने की कोशिश की लेकिन पुलिस कर्मियों के एक दल ने उन्हें कार्यालय से बाहर जाने से रोक दिया। पुलिस ने गेट पर अवरोधक लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारियों को वहीं रोक दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिनपर ‘हम वक्फ विधेयक को अस्वीकार करते हैं’ और ‘नेकां (नेशनल कॉन्फ्रेंस) की चुप्पी आपराधिक है’ जैसे संदेश लिखे हुए थे। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को निरस्त करने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की, जिसके बाद प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक तितर-बितर हो गए। पत्रकारों से बात करते हुए आलम ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा, 'हम वक्फ विधेयक का विरोध करना चाहते थे। हम समझते हैं कि समाज का कोई भी वर्ग इस विधेयक को स्वीकार नहीं करता। जिस तरह से इसे आधी रात को संसद में पारित किया गया, हम उसे अस्वीकार करते हैं।'
पीडीपी महासचिव ने कहा कि देश के मुसलमानों के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दृष्टिकोण निंदनीय है, लेकिन इस मुद्दे पर नेकां की आपराधिक चुप्पी खेदजनक है। उन्होंने कहा, 'हम इस अधिनियम को पारित करने में नेकां की भूमिका की निंदा करते हैं।' उन्होंने कहा कि नेकां लोगों को मूर्ख बना रही है।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में शुक्रवार की नमाज के बाद आसिफी मस्जिद में शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद के नेतृत्व में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने सऊदी अरब के मदीना में जन्नतुल बाक़ी के पवित्र कब्रिस्तान को ध्वस्त करने का भी विरोध किया और मांग की कि इसे फिर से बनाया जाए।
शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद कहते हैं, '...नीतीश (कुमार) और (चंद्रबाबू) नायडू के चेहरे से नकाब उतर गया है। वे नकली धर्मनिरपेक्षतावादी हैं। वे सभी आरएसएस में शामिल हो गए हैं। उन्हें सबक सिखाना जरूरी है...भारत का धर्मनिरपेक्ष ढांचा खतरे में है। धर्मनिरपेक्ष लोगों, जिसमें मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों शामिल हैं, को इसके खिलाफ उठ खड़ा होना होगा...अभी मुस्लिम निशाने पर हैं, लेकिन दूसरा निशाना दलित हैं...'
महाराष्ट्र के मुंबई में पुलिस ने एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान और पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जो वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए, AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान कहते हैं, 'बायकुला मस्जिद के ट्रस्टियों ने हमें मोदी सरकार द्वारा लाए गए काले वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए बुलाया है। हमारा शांतिपूर्ण विरोध पूरे देश में जारी रहेगा क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और 16 अप्रैल को सुनवाई होगी... हम चाहते हैं कि इस कानून को वापस लिया जाए जैसे कृषि कानूनों को निरस्त किया गया था...'
बता दें, पिछले कई दिनों से संसद से लेकर सड़क तक वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पेश होने से लेकर पास होने तक विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। अब ये विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद कानून बन चुका है। जिसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
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