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यूपी, बंगाल, कश्मीर, महाराष्ट्र... देशभर के अलग-अलग हिस्सों में वक्फ कानून के खिलाफ हुआ विरोध; सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

देशभर के कई हिस्सों में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन हुए और रैली निकाली गई। कोलकाता के आलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने वक्फ अधिनियम के विरोध में रैली निकाली। वहीं कश्मीर में वक्फ कानून के खिलाफ पीडीपी के मार्च को पुलिस ने रोका। लखनऊ में इस अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। साथ ही मुंबई में भी इसके खिलाफ प्रदर्शन देखा गया।

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देशभर के कई हिस्सों में वक्फ कानून के खिलाफ विरोध हुआ।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ देशभर के कई जगहों में विरोध प्रदर्शन और विरोध रैली देखने को मिली। जुमे के नमाज के बाद कई जगहों पर इसके खिलाफ विरोध हुआ। कोलकाता में छात्रों ने वक्फ अधिनियम के विरोध में रैली निकाली, तो कश्मीर में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ पीडीपी के मार्च को पुलिस ने रोका। महाराष्ट्र के मुंबई और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

आलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने कानून के विरोध में निकाली रैली

शहर स्थित आलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने शुक्रवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में रैली निकाली और कानून को वापस लेने की मांग की। रैली में शामिल लोगों ने पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधकों को पार करने के बाद पार्क सर्कस क्षेत्र में ‘सेवन पॉइंट क्रॉसिंग’ को भी कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया। अलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने परिसर से मार्च निकाला और नारे लगाते हुए मांग की कि कानून वापस लिया जाए।

रैली में शामिल एक छात्र ने कहा, 'भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात कर रही है, लेकिन एक समुदाय के साथ भेदभाव किया जा रहा है।' भाजपा ने कहा है कि वह वक्फ (संशोधन) अधिनियम के लाभों का प्रचार करने और विपक्ष की आलोचना का मुकाबला करने के लिए 20 अप्रैल से विशेष रूप से मुसलमानों को ध्यान में रखकर एक पखवाड़े तक जन जागरूकता अभियान शुरू करेगी।

पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मुस्लिम समुदाय के सदस्य कोलकाता में सड़कों पर उतरे।

कश्मीर में वक्फ कानून के खिलाफ पीडीपी के मार्च को पुलिस ने रोका

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के पारित होने के खिलाफ श्रीनगर में शुक्रवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विरोध मार्च को पुलिस ने रोक दिया, पार्टी कार्यालय पर अवरोधक लगा दिए गए और प्रदर्शनकारियों को परिसर के अंदर ही रोक दिया। पार्टी महासचिव खुर्शीद आलम के नेतृत्व में पीडीपी के अनेक कार्यकर्ता इस अधिनियम के पारित होने के विरोध में यहां शेर-ए-कश्मीर पार्क के समीप पार्टी मुख्यालय पर एकत्र हुए। यह अधिनियम पिछले सप्ताह पारित हुआ था। पीडीपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से बाहर निकलकर शहर के केंद्र की ओर मार्च करने की कोशिश की लेकिन पुलिस कर्मियों के एक दल ने उन्हें कार्यालय से बाहर जाने से रोक दिया। पुलिस ने गेट पर अवरोधक लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारियों को वहीं रोक दिया गया।

प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिनपर ‘हम वक्फ विधेयक को अस्वीकार करते हैं’ और ‘नेकां (नेशनल कॉन्फ्रेंस) की चुप्पी आपराधिक है’ जैसे संदेश लिखे हुए थे। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को निरस्त करने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की, जिसके बाद प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक तितर-बितर हो गए। पत्रकारों से बात करते हुए आलम ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा, 'हम वक्फ विधेयक का विरोध करना चाहते थे। हम समझते हैं कि समाज का कोई भी वर्ग इस विधेयक को स्वीकार नहीं करता। जिस तरह से इसे आधी रात को संसद में पारित किया गया, हम उसे अस्वीकार करते हैं।'

पीडीपी महासचिव ने कहा कि देश के मुसलमानों के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दृष्टिकोण निंदनीय है, लेकिन इस मुद्दे पर नेकां की आपराधिक चुप्पी खेदजनक है। उन्होंने कहा, 'हम इस अधिनियम को पारित करने में नेकां की भूमिका की निंदा करते हैं।' उन्होंने कहा कि नेकां लोगों को मूर्ख बना रही है।

लखनऊ में जुमे की नमाज के बाद वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में शुक्रवार की नमाज के बाद आसिफी मस्जिद में शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद के नेतृत्व में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने सऊदी अरब के मदीना में जन्नतुल बाक़ी के पवित्र कब्रिस्तान को ध्वस्त करने का भी विरोध किया और मांग की कि इसे फिर से बनाया जाए।

शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद कहते हैं, '...नीतीश (कुमार) और (चंद्रबाबू) नायडू के चेहरे से नकाब उतर गया है। वे नकली धर्मनिरपेक्षतावादी हैं। वे सभी आरएसएस में शामिल हो गए हैं। उन्हें सबक सिखाना जरूरी है...भारत का धर्मनिरपेक्ष ढांचा खतरे में है। धर्मनिरपेक्ष लोगों, जिसमें मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों शामिल हैं, को इसके खिलाफ उठ खड़ा होना होगा...अभी मुस्लिम निशाने पर हैं, लेकिन दूसरा निशाना दलित हैं...'

वारिस पठान और AIMIM के कई नेताओं को हिरासत में लिया

महाराष्ट्र के मुंबई में पुलिस ने एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान और पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जो वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए, AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान कहते हैं, 'बायकुला मस्जिद के ट्रस्टियों ने हमें मोदी सरकार द्वारा लाए गए काले वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए बुलाया है। हमारा शांतिपूर्ण विरोध पूरे देश में जारी रहेगा क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और 16 अप्रैल को सुनवाई होगी... हम चाहते हैं कि इस कानून को वापस लिया जाए जैसे कृषि कानूनों को निरस्त किया गया था...'

बता दें, पिछले कई दिनों से संसद से लेकर सड़क तक वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पेश होने से लेकर पास होने तक विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। अब ये विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद कानून बन चुका है। जिसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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