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इंडियन एयरफोर्स की ये तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें ऐसा मारेंगी भूल जाएंगे S-400, भारतीय आसमान में आने की भी नहीं सोचेंगे दुश्मन के विमान

IAF News: प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाई जाएंगी, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है। ये मिसाइलें मिलकर एक लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड बनाएंगी जो फाइटर एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइलों और ऊंची उड़ान भरने वाले अहम एसेट्स सहित कई तरह के हवाई खतरों का मुकाबला करने में सक्षम होगी।

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इंडियन एयरफोर्स की ये तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें ऐसा मारेंगी भूल जाएंगे S-400

Indian Air Force Missiles: भारत प्रोजेक्ट कुशा के साथ लंबी दूरी की एयर डिफेंस में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। एयर डिफेंस सिस्टम को इंडियन एयरफोर्स द्वारा संभाला जाता है। साथ ही में जमीनी स्तर पर भारतीय सेना भी इसको हैंडल करती है। देखा जाए तो आज के आधुनिक युद्ध में फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, मिसाइलें चलती हैं, ऐसे में इनको आसमान में मारना व वे भारत के आसमान में आए तो वापस ना जा पाएं, इस सिद्धांत के साथ तैयारी करनी होगी। पाकिस्तान से जब पिछले साल संघर्ष हुआ तो रूस से आए S-400 ने खूब साथ निभाया और दुश्मन देश के सारे हमले बेअसर कर दिए। लेकिन अब बात इससे भी मजबूत सिस्टम की हो रही है, जो दुश्मन को खूब मारेगी। यह ऐसा प्रोग्राम है जिसका मकसद नई पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाना है, जिनकी क्षमताएं S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बराबर होंगी और कुछ मामलों में उससे बेहतर भी होंगी।

आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट के चीफ, अंकाथी राजू ने कुछ जरूरी डिटेल्स शेयर की हैं, जिनसे इस रणनीतिक पहल के दायरे और मकसद पर रोशनी पड़ती है। राजू के मुताबिक, प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाई जाएंगी, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है। ये मिसाइलें मिलकर एक लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड बनाएंगी जो फाइटर एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइलों और ऊंची उड़ान भरने वाले अहम एसेट्स सहित कई तरह के हवाई खतरों का मुकाबला करने में सक्षम होगी। इसका मुख्य मकसद स्वदेशी क्षमताओं को एडवांस्ड ग्लोबल सिस्टम के बराबर लाना और आखिरकार उनसे आगे निकलना है।

M1 मिसाइल का काम

M1 इंटरसेप्टर की एंगेजमेंट रेंज 150 किलोमीटर रखने की योजना है, जो इसे दुनिया भर में अभी इस्तेमाल हो रही कई मीडियम-रेंज एयर डिफेंस मिसाइलों से आगे रखती है। यह रेंज 9M96E2 जैसी मिलती-जुलती इंटरसेप्टर मिसाइलों से बेहतर है, जिसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 120 किलोमीटर है। इस क्षमता के साथ, M1 से उम्मीद है कि यह ज्यादा दूरी पर खतरों को संभाल सकेगी, साथ ही हाई एक्यूरेसी और तेज रिएक्शन टाइम भी देगी।

दूसरी इंटरसेप्टर मिसाइल M2

इस फैमिली की दूसरी इंटरसेप्टर, M2, की रेंज 250 किलोमीटर होगी। यह इसे S-400 सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली 48N6DM और 48N6E3 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों की कैटेगरी में रखती है। उम्मीद है कि M2 प्रोजेक्ट कुशा की लंबी दूरी की एंगेजमेंट क्षमता की रीढ़ बनेगी, जो तेज गति वाले और ज्यादा ऊंचाई वाले टारगेट के खिलाफ मजबूत कवरेज देगी।

सबसे महत्वाकांक्षी इंटरसेप्टर मिसाइल M3

प्रोजेक्ट कुशा का सबसे महत्वाकांक्षी हिस्सा M3 इंटरसेप्टर है। आधिकारिक तौर पर, इसकी मौजूदा प्लान की गई रेंज 350 किलोमीटर है, जो S-400 सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली 40N6E मिसाइल की 400 किलोमीटर की रेंज से थोड़ी कम है। हालांकि, चल रहे सुधारों से M3 की रेंज लगभग 400 किलोमीटर तक पहुंच सकती है, जिससे यह रेंज के मामले में 40N6E के पूरी तरह बराबर हो जाएगी। यह बढ़ी हुई रेंज M3 को दुश्मन के एयरस्पेस के काफी अंदर टारगेट को निशाना बनाने की इजाजत देगी, जिससे रणनीतिक एयर डिफेंस और रोकने की क्षमताएं काफी बढ़ जाएंगी।

कब मिलेंगी ये मिसाइलें?

M3 इंटरसेप्टर का पहला टेस्ट 2028 तक होने की उम्मीद है। यह टाइमलाइन DRDO अधिकारियों के लिए भी जरूरी है, जिनको ये तय करना है कि मिसाइल अपने तय परफॉर्मेंस बेंचमार्क को पूरा करे या उससे बेहतर प्रदर्शन करे। अपने शुरुआती ट्रायल्स के समय तक, M3 के 40N6E की पूरी 400 किलोमीटर की रेंज से काफी करीब पहुंचने की उम्मीद है।

प्रोजेक्ट कुशा क्या है?

प्रोजेक्ट कुशा इम्पोर्टेड एयर डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता कम करने और भारत की रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से एक स्केलेबल, स्वदेशी विकल्प बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। M1, M2 और M3 मीडियम से लेकर बहुत लंबी रेंज को कवर करते हैं, यह प्रोग्राम एक व्यापक, भविष्य के लिए तैयार एयर डिफेंस सॉल्यूशन देने के लिए तैयार है जो दुनिया भर में अभी तैनात सबसे एडवांस्ड सिस्टम को टक्कर देता है।

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 Nitin Arora
Nitin Arora author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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