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'किसको बचाना चाहती है सरकार?' NEET विवाद पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने शिक्षा मंत्री से पूछे तीखे सवाल

NEET Controversy: नीट विवाद पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से सवाल किया कि 'सरकार सिस्टम में किसको बचाना चाहती है?' वहीं प्रधान ने परीक्षार्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा था कि किसी भी बच्चे के करियर के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। आपको बताते हैं किसने क्या बोला।

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प्रियंका गांधी वाड्रा ने धर्मेंद्र प्रधान को सुनाई खरी-खोटी।

Photo : Times Now Digital

Priyanka Gandhi Vadra Slams Education Minister: नीट यूजी परीक्षा परिणाम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को नीट विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से सवाल किए।

नीट विवाद पर प्रियंका ने शिक्षा मंत्री पर उठाया सवाल

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'भाजपा की नई सरकार ने शपथ लेते ही युवा के सपनों पर फिर से प्रहार शुरू कर दिया है। नीट परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियों पर शिक्षा मंत्री का अहंकार भरा जवाब 24 लाख छात्रों एवं उनके अभिभावकों की चीख-पुकार को पूरी तरह से अनदेखी करता है।'

'सरकार सिस्टम में किसको बचाना चाहती है?', प्रियंका

प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री से सवाल पूछते हुए कहा, 'क्या शिक्षा मंत्री जी को सार्वजनिक रूप से मौजूद तथ्य नहीं दिखते?, क्या बिहार और गुजरात में जो पुलिस कार्रवाइयां हुईं और रैकेट पकड़े गए, सरकार उन्हें भी झूठा मानती है?, क्या 67 टॉपर को पूरे मार्क्स मिलना भी झूठ है? सवाल यह है कि लाखों युवाओं और उनके माता-पिता की अनदेखी कर सरकार सिस्टम में किसको बचाना चाहती है?'

प्रियंका गांधी ने आगे लिखा, 'क्या युवाओं के सपनों को इस भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली की भेंट चढ़ाना बंद नहीं होना चाहिए? क्या सरकार की ये जिम्मेदारी नहीं बनती कि छात्रों व अभिवावकों की बात की अनदेखी करने की बजाय, शिकायतों पर गंभीरता से गौर करे व एक्शन ले? भाजपा सरकार को अपना अहंकार त्यागकर युवाओं के भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उपाय करने चाहिए।'

धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षार्थियों को दिया है ये आश्वासन

इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षार्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा था कि किसी भी बच्चे के करियर के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार जो भी आवश्यक कदम उठाने होंगे, सरकार उसे पूरा करेगी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शुक्रवार को लिखा, 'एनईईटी (नीट) मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत परीक्षार्थियों के हितों को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। मैं परीक्षार्थियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भी बच्चे के करियर के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। इस मामले से जुड़े तथ्य सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जो भी आवश्यक कदम उठाने होंगे, सरकार उसे पूरा करेगी। एनईईटी की काउंसलिंग शुरू होने जा रही है और अब इस दिशा में भ्रमित हुए बिना आगे बढ़ने की आवश्यकता है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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