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माफिया अतीक अहमद के बेटे को ढेर करने वाली UP STF टीम को राष्ट्रपति पदक, झांसी में हुआ था एनकाउंटर

President Gallantry Medal: यूपी के कुल 17 पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रपति वीरता पदक दिया गया है। इसमें माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और शूटर मोहम्मद गुलाम का एनकाउंटर करने वाली यूपी एसटीएफ टीम के 6 अधिकारी भी शामिल हैं।

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अतीक अहमद के बेटे असद का एनकाउंटर करने वाली एसटीएफ टीम को राष्ट्रपति वीरता पदक का ऐलान।

Photo : BCCL

President Gallantry Medal: पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और शूटर मोहम्मद गुलाम का एनकाउंटर करने वाली यूपी एसटीएफ (UP STF) टीम को राष्ट्रपति वीरता पदक देने का ऐलान किया गया है। असद और मोहम्मद गुलाम उमेश पाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी थे और दोनों के सिर पर पांच लाख का इनाम था। बीते साल 13 अप्रैल को झांसी में एसटीएफ की टीम ने दोनों को एनकाउंटर में ढेर किया था।

जानकारी के मुताबिक, इस एसटीएफ टीम का नेतृत्व करने वाले विमल कुमार सिंह और नवेंदु कुमार समेत छह लोगों को प्रेसिडेंट गैलेंट्री मेडल देने का ऐलान किया गया है। इस टीम में ज्ञानेंद्र कुमार राय, अनिल कुमार सिंह, सुशील कुमार और सुनील कुमार भी शामिल हैं।

यूपी पुलिस के 17 जाबांज अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक

यूपी एसटीफ के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस के कुल सत्तरह जांबाज अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस-2024 के अवसर पर राष्ट्रपति वीरता पदक प्रदान किया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से जारी पत्र के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश पुलिस और होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा के कर्मियों को यह पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इन कर्मियों में विभिन्न रैंक के अधिकारी और सिपाही शामिल हैं, जिन्होंने अपनी बहादुरी और समर्पण से समाज को सुरक्षा प्रदान की है।

इन अधिकारियों को मिला सम्मान

जितेंद्र कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह चौहान, अनिल कुमार, हरिओम सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, विपिन कुमार, विमल कुमार सिंह, नवेंदु कुमार, ज्ञानेंद्र कुमार राय, अनिल कुमार सिंह, सुनील कुमार, सुशील कुमार, राजीव चौधरी, जयवीर सिंह, रईस अहमद, अरुण कुमार, और अजय कुमार को वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान इन पुलिसकर्मियों के अदम्य साहस और पेशेवर योग्यता को मान्यता देने के लिए है। राष्ट्रपति का यह सम्मान उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रति उनके अद्वितीय सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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