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पीएम मोदी ने ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर से की बात, दी जीत की बधाई

Olympic Medalist Manu Bhaker: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर से फोन पर बात की है। उन्होंने मनु भाकर को कांस्य पदक जीतने की बधाई भी दी है। मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला मेडल जीता है।

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मनु भाकर

Photo : ANI

Olympic Medalist Manu Bhaker: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर से फोन पर बात की है। उन्होंने मनु भाकर को कांस्य पदक जीतने की बधाई भी दी है। भारत की महिला निशानेबाज मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला मेडल जीता है। इससे पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर मनु भाकर को बधाई दी थी।

पीएम मोदी ने लिखा, 'यह एक ऐतिहासिक मेडल है। मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में भारत का पहला मेडल जीतने पर बधाई। उन्होंने कांस्य पदक जीता। वह भारत के लिए शूटिंग में मेडल जीतने वाली पहली महिला हैं, इससे यह सफलता और खास बन जाती है। यह एक अविश्वसनीय उपलब्धि है।'

राष्ट्रपति मुर्मू ने भी दी बधाई

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, मनु भाकर को 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में कांस्य पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक में देश के लिए पहला पदक हासिल करने पर बहुत बधाई। वह शूटिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। मनु भाकर पर सारा देश गर्व कर रहा है। उनकी इस उपलब्धि से कई खिलाड़ियों, खासकर महिला खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। भविष्य में उनके और भी ऊंचाइयां छूने की कामना करती हूं।

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मनु भाकर के घर खुशी का माहौल

ओलंपित में पदक जीतने के बाद हरियाणा की रहने वाली मनु भाकर के घर खुशी का माहौल है। मनु भाकर की मां ने बताया, मेरी सोसाइटी में सभी लोगों ने इकट्ठे होकर मनु के मैच को देखा है। आज बहुत बड़ा दिन है, बेटी ने बहुत अच्छा खेल दिखाया, सभी की मेहनत रंग लाई। आज पूरी देश-दुनिया उसको देख रही है। अभी वह शूटिंग में और भी इवेंट में हिस्सा लेगी, इसके बाद जब वह देश आएगी, तो मैंने उसके स्वागत का खास प्लान बना रखा है। बता दें, मनु भाकर देश की पहली ऐसी महिला निशानेबाज हैं, जिन्होंने भारत के लिए ओलंपिक में पदक जीता है। पेरिस ओलंपिक 2024 में उनके द्वारा मेडल जीतने से परिवार में खुशी का माहौल है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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