Ayodhya News: अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए व्याकुल श्रद्धालुओं का इंतजार अब खत्म होने वाला है। अगले वर्ष 22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके बाद 26 जनवरी से पहले श्रद्धालु मंदिर में भगवान राम के दर्शन कर सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से ये जानकारी सझा की गई है।
पीएम मोदी 22 जनवरी को करेंगे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra) ट्रस्ट ने बुधवार को एक्स पर इससे जुड़ी जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा दिनांक 22 जनवरी 2024 को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कर कमलों द्वारा की जाएगी।'
राम मंदिर को लेकर पीएम मोदी ने जाहिर की खुशी
पीएम मोदी ने इसे लेकर एक्स पर लिखा, 'जय सियाराम! आज का दिन बहुत भावनाओं से भरा हुआ है। अभी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी मुझसे मेरे निवास स्थान पर मिलने आए थे। उन्होंने मुझे श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या आने के लिए निमंत्रित किया है। मैं खुद को बहुत धन्य महसूस कर रहा हूं। ये मेरा सौभाग्य है कि अपने जीवनकाल में, मैं इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनूंगा।'
श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति की स्थापना की तारीख 22 जनवरी, 2024 तय की। उन्होंने इसे लेकर क्या कहा, नीचे सुनिए।
26 जनवरी से पहले रामलला के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इससे पहले ये जानकारी साझा की थी कि अयोध्या में सरयू तट पर स्थित अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से ना सिर्फ खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों व अवशेषों को दर्शाया जाएगा बल्कि इस आंदोलन की कानूनी, राजनीतिक और धार्मिक यात्रा का विवरण प्रस्तुत करने वाला एक विशेष प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा। एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे मिश्रा ने बताया था कि संग्रहालय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लीज पर मिल गया है और इसमें काम शुरू किया जा रहा है।
राम मंदिर से जुड़े संग्रहालय में क्या-क्या होगा?
मिश्रा ने उस वक्त कहा था, 'कुछ चीजें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई के दौरान मिलीं और कुछ मंदिर निर्माण कार्य के लिए की गई खुदाई के दौरान मिलीं। उन्हें बहुत ही सुरक्षित तरीके से... कुछ तो न्यायालय के आदेशों से सुरक्षित रखा गया है और कुछ ट्रस्ट के पास सुरक्षित रखा गया है।' उन्होंने बताया था कि एएसआई से अनुमति लेकर इन सभी मूर्तियों व अवशेषों को संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। संग्रहालय में अलग-अलग प्रकोष्ठ होंगे। एक प्रकोष्ठ ऐसा होगा, जिसमें कौन-कौन सी चीजें खुदाई और निर्माण कार्य के दौरान मिलीं, उन्हें रखा जाएगा। एक दूसरा प्रकोष्ठ होगा, जिसमें 500 से भी अधिक वर्षों की उस लंबी कानूनी, राजनीतिक और धार्मिक यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा जिसका पटाक्षेप 2019 में उच्चतम न्यायालय के फैसले से हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में सुनाया था फैसला
नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में फैसला देते हुए केंद्र सरकार को निर्देशित किया था कि वह तीन माह के भीतर मंदिर निर्माण के लिए एक न्यास की स्थापना करे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की घोषणा की। नृपेंद्र मिश्रा न्यास के सदस्य होने के साथ ही मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष भी हैं। भक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है और श्रीराम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा अगले वर्ष 22 जनवरी को होगी।
