PM Modi Will Interact With CMs: सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पश्चिम एशिया संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे। चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें भाग नहीं लेंगे। बता दें कि ईरान युद्ध के बाद देश में एलपीजी किल्लत को लेकर सियासत तेज हो गई है। इसे लेकर विपक्ष सरकार को निशाने पर ले रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है और लोग पैनिक न करें।
पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को उन राज्यों को छोड़कर, जहां चुनाव होने वाले हैं, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे और पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर उनकी तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य 'टीम इंडिया' की भावना से प्रेरित होकर प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना है। यह पहली बार है कि प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमले से हुई थी। ईरान ने भी अपने खाड़ी पड़ोसी देशों और इजराइल पर बड़े हमले करके जवाबी कार्रवाई की है।
सूत्रों ने बताया, प्रधानमंत्री कल शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पश्चिम एशिया संघर्ष पर राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य 'टीम इंडिया' की भावना से प्रेरित होकर प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा। आचार संहिता (एमसीसी) के कारण चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग-अलग बैठक करेगा।
सोमवार को लोकसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न कठिन वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहने की संभावना है और उन्होंने राष्ट्र से कोविड-19 महामारी के दौरान एकजुट रहने की तरह ही तैयार और एकजुट रहने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने सदन का ध्यान संकट के आंतरिक सुरक्षा पहलू की ओर भी दिलाया और चेतावनी दी कि कुछ तत्व ऐसी स्थितियों का फायदा उठाने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों सहित सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें
ईरान-इजराइल युद्ध के बीच कई देशों में ईधन को लेकर अस्थिरता का माहौल है। भारत में भी पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैलने लगी हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन और एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। गुरुवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय Ministry of Petroleum and Natural Gas ने पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी और PNG को लेकर फैल रही अफवाहों पर बड़ा बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल-डीज़ल का 60 दिनों का स्टॉक है और LPG की महीनेभर सप्लाई प्रभावित नहीं होगी, जबकि PNG की कहीं भी कोई कमी नहीं है और सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो और पोस्ट भ्रामक
मंत्रालय के अनुसार सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो और पोस्ट भ्रामक हैं, जिनका मकसद अनावश्यक घबराहट फैलाना है। लोगों से अपील की गई है कि केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। देशभर में 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से खुले हैं। किसी भी पेट्रोल पंप को राशनिंग का निर्देश नहीं दिया गया है। कुछ जगहों पर भीड़ केवल अफवाहों के कारण हुई, लेकिन सभी उपभोक्ताओं को ईंधन मिला। तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को अतिरिक्त क्रेडिट देकर सप्लाई और मजबूत की है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक है, इसलिए घरेलू उपलब्धता मजबूत बनी हुई है।
