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भाईयों-बहनों से लेकर परिवारजनों तक...देश के नाम संबोधन में बदली PM Modi की टैगलाइन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 15, 2023, 08:41 AM IST

PM Modi Speech on Independence Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले परिवारजनों शब्द का प्रयोग देश को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते वक्त किया। उन्होंने अपने पूरे भाषण में परिवारजनों शब्द का प्रयोग किया। जबकि, अमूमन प्रधानमंत्री देशवासियों शब्द का इस्तेमाल करते हैं।

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लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Photo : Twitter

PM Modi Speech on Independence Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी जनता को संबोधित करते हैं तो उनके भाषण की शुरुआत मेरे प्यार देशवासियों या फिर भाईयों-बहनों से होती है। यह प्रधानमंत्री का तकिया कलाम या फिर टैगलाइन भी मानी जाती है। हालांकि, इस बार जब प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचारी से देश को संबोधित किया, तो उनके भाषण में कुछ बदलाव देखा गया।

पीएम मोदी ने अपने तकिया कलाम में कुछ बदलाव किया। उन्होंने भाषण में बार-बार देशवासियों या फिर भाईयों-बहनों की जगह जनता को परिवारजनों कहकर संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में कई जगहों पर 'परिवारजनों' शब्द का प्रयोग किया।

जब दीं शुभकामनाएं...

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले परिवारजनों शब्द का प्रयोग देश को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते वक्त की। उन्होंने कहा, इतना बड़ा देश, 140 करोड़ मेरे भाई-बहन, मेरे परिवारजन... आज आजादी का पर्व मना रहे हैं। मैं देश के कोटि-कोटि जनों को, देश और दुनिया में भारत को प्यार करने वाले, भारत का सम्मान करने वाले कोटि-कोटि जनों को इस महान पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। बता दें, अमूमन प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों शब्द का इस्तेमाल करते हैं।

हजार साल का लिखेंगे भाग्य

पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा, मेरे प्यारे परिवारजनों इतिहास के कुछ पल अमिट छाप छोड़कर जाते हैं। एक राजा की पराजय की छोटी सी घटना के कारण भारत को हजार साल की गुलामी का सामाना करना पड़ा। छोटी घटनाएं भी हजार साल तक प्रभाव छोड़ जाती हैं। इस समय देश ऐसे मोड़ पर रड़ा है, जहां लिए गए फैसले हजार साल आगे का भाग्य लिखेंगे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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